बस्ती। दूध उत्पादन वही है पर शहर में दूध के साथ पनीर की खपत बढ़ रही है। ऐसे में मिलावट करने वाले अपना धंधा चमका रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल है। लोग रकम खर्च करने के बाद भी शुद्ध दूध नहीं पा रहे हैं। सहालग में मांग बढ़ी तो पाउडर वाला दूध धंधेबाज के लिए मुफीद बना।
जानकारों ने बताया कि धंधेबाज मिलावट के जरिये दूध-पनीर की मांग पूरी कर रहे हैं। बाहर से पनीर मंगवा कर उसे दो से चार दिन तक फ्रीज में करके बेंच रहे हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक है। खाद्य विभाग की सक्रियता के बावजूद धंधेबाज बाजार में मिलावटी पनीर बिक्री करने से चूक नहीं रहे हैं। वह मिलावटी दूध की मदद से इसे तैयार कर बाजार में उतार दे रहे हैं। पनीर बनाने के लिए पाउडर वाले दूध के साथ सोयाबीन के बीज को पीसकर मिलाया जा रहा है। ऐसे में सेहत को लेकर खुद न सावधान हुए तो बीमार पड़ने से कोई रोक नहीं सकता।
शहर में दूध और पनीर की बढ़ती खपत और घटते उत्पादन ने धंधेबाजों को बड़ा मौका दे दिया है। वे दूध में पानी मिला ही रहे थे, अब पाउडर से बना दूध भी बेच रहे हैं। इसमें झाग के लिए डिटर्जेंट भी मिलाते हैं। यह मिलावटी दूध पीकर बच्चों से लेकर बड़े तक बीमार पड़ रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से भेजे गए गाय और भैंस के दूध के नमूने में भी मिलावट की पुष्टि कई बार हुई है।
बढ़ती मिलावट को देखते हुए डॉक्टर भी छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में बाजार में बच्चों वाले पाउडर दूध का कारोबार हर माह 50 लाख रुपये से ऊपर का हो चुका है। दूध के व्यापार से जुड़े कुछ जानकारों के अनुसार, शहर में करीब दो लाख लीटर दूध की खपत प्रतिदिन है। त्योहार व अन्य विशेष अवसरों पर खपत तीन से पांच लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इसमें घरों के अलावा दुकानों पर होने वाली खपत भी शामिल है। जबकि पशुपालक लगभग 50 हजार लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं।
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दूध में पानी मिलाना भी नुकसानदेह
फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि दूध में पानी मिलाना सबसे आसान काम है। यदि दूध में पानी किसी हैंडपंप का डाल गया है तो उसमें तमाम हानिकारक बैक्टीरिया स्वतः पहुंच जाते हैं। ऐसा दूध पीने से पेट की बीमारी होती। इसीलिए कई विकसित देशों में केवल पाश्चुराइज्ड दूध ही पीने को मिलता है। पैकेट के दूध में मिलावट की संभावना नहीं होती। क्योंकि इसकी जांच होती है और मिलावट पर कारोबार खत्म हो सकता है। जानकारों ने बताया कि शहर हो या देहात क्षेत्र की शादियां, अब हर जगह पनीर के सब्जी की मांग सब करते हैं। एकाएक मांग बढ़ जाने का फायदा धंधेबाजों को होता है। वह मऊ, गाजीपुर, टांडा, नवाबगंज, बलरामपुर से ऐसे पनीर की खेप मंगा देते हैं। किसी छोटे से समारोह में भी पनीर की अधिक जरूरत है तो आप डिमांड केवल करिए, दुकानदार तीन से चार घंटे में इसे तैयार करा देते हैं। शहर में ही केवल छोटी-बड़ी 200 से अधिक मिठाई की दुकानें हैं, हर जगह ट्रे या भगौने में पानी में रखा हुआ पनीर दिख जाए तो आश्चर्य नहीं। यही पनीर कई दिनों तक फ्रिज में रखते हैं और तत्काल ग्राहक को उठाकर दे देते हैं।
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बाहरी दूध के आपूर्ति पर निर्भर है जिला
पैकेट दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब 60 हजार लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। शेष बचे एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति मिलावट से होती है। धंधेबाज गाय- भैंस के 10 लीटर दूध में पाउडर से बना दूध भी लगभग उतनी ही मात्रा में मिला देते हैं। दूध में झाग बने, इसके लिए थोड़ी मात्रा में डिटर्जेंट भी मिलाया जाता है। इस तरह से बनाए गए मिलावटी गाय के दूध का नमूना खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई बार फेल हो चुके हैं। बाइक से घूम-घूमकर दूध पहुंचाने वाले एक शख्स ने बताया कि चाय- कॉफी की दुकानों पर पाउडर वाले दूध की खपत अधिक होती है। यह दूध 50 रुपये लीटर दिया जाता है। वहीं घरों में गाय का दूध 55 और भैंस का दूध 65 रुपये लीटर दिया जाता है। इसमें पानी की अधिकता होती है।
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मिलावटी दूध पीकर बच्चे हो रहे बीमार
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल कहा कहना है कि हर दिन ओपीडी में ऐसे बच्चे आते हैं, जिन्हें दूध पीने की वजह से डायरिया, एलर्जी आदि की दिक्कत होती है। इसीलिए छह माह से कम उम्र के बच्चों को सिर्फ मां का दूध पिलाने और उससे अधिक उम्र के बच्चों को जरूरत पड़ने पर अच्छी कंपनी का पाउडर वाला दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। मिलावटी दूध पीने से लीवर और किडनी पर भी असर पड़ता है।
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रोडवेज, अस्पताल और शास्त्री चौक पर दूध और पनीर का कारोबार
शहर के रोडवेज, अस्पताल चौराहा, शास्त्री चौक और पांडेय बाजार में दूध और पनीर का कारोबार सबसे अधिक है। मेंहदावल रोड पर पनीर का खेल चल रहा। साथ ही खुले में दूध की बिक्री खूब की जाती है। कारोबारी गाय और भैंस का अलग-अलग दूध बताकर बेच रहे हैं। जानकारों की मानें तो पाउडर मिलाकर पानी वाला दूध अधिक गाढ़ा कर दिया जाता है। इसे भैंस का दूध बताया जाता है और कम गाढ़ा दिखने वाला दूध गाय का बताया जा रहा है।
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नहीं है तत्काल जांच की सुविधा
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम मिलावटखोरी की धरपकड़ के लिए निकलती जरूर है। मगर, तत्काल जांच की सुविधा न होने से ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। पिछले दिनों शहर के एक पनीर की दुकान पर विभागीय अधिकारी पहुंचे, उन्हें दूध और पनीर में मिलावट का संदेह हुआ। नमूने की तत्काल जांच कराने के लिए दुग्ध विभाग से संपर्क किया गया।मगर, हाथ खड़े कर दिए गए। तत्काल जांच की व्यवस्था न होेने से अधिकतर जगहों से टीम को हिदायत देकर लौट आना पड़ता है। केवल शिकायत वाले मामले में ही ज्यादातर नमूने लिए जाते हैं।
कोट
दीपावली में जो टीम सक्रिय थी, वही टीम फिर से सक्रिय कर दी गई है। मिलावटी खाद्य पदार्थों पर निगरानी की जा रही है। टीम पनीर, दूध प्लांट पर जा रही है, जहां सैंपल भरे जा रहे हैं। सहालग में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती।