परशुरामपुर थाना क्षेत्र में जीएसटी के नाम पर करीब 39 लाख रुपये के फर्जी बिल जारी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कारोबारी का जीएसटी और आयकर संबंधी कार्य देखने वाले व्यक्ति ने रिटर्न दाखिल कराने के बहाने ओटीपी हासिल कर फर्म का पंजीकृत मोबाइल नंबर और ई-मेल बदल दिया।
आरोप है कि इसके बाद फर्म के नाम पर करीब 39 लाख रुपये के फर्जी बिल जारी कर दिए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ग्राम चोरहा निवासी रत्नेश पांडेय ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी फर्म वैष्णवी इंटरप्राइजेज का जीएसटी और आयकर संबंधी कार्य अयोध्या के ठठरिया अंगूरी बाग, कोतवाली क्षेत्र निवासी अजय जोशी देखते थे।
रत्नेश के अनुसार उन्होंने अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर और ई-मेल के माध्यम से केवल तीन वैध बिल क्रमशः 2.99 लाख, 5.42 लाख और 2.74 लाख रुपये के जारी किए थे। आरोप है कि करीब तीन माह पहले अजय जोशी ने जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के बहाने मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी मांगा।
विश्वास में आकर ओटीपी साझा करने के बाद आरोपी ने जीएसटी पोर्टल पर फर्म का पंजीकृत मोबाइल नंबर और ई-मेल बदल दिया। बाद में जब उन्होंने जीएसटी पोर्टल की यूजर आईडी और पासवर्ड मांगा तो आरोपी ने देने से इन्कार कर दिया और मोबाइल बंद कर लिया।
पीड़ित ने बताया कि संदेह होने पर जब वह राज्य कर विभाग, बस्ती कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि उनकी फर्म के नाम पर बिना अनुमति करीब 39 लाख रुपये के फर्जी जीएसटी बिल जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
थाना प्रभारी विश्व मोहन राय ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच उपनिरीक्षक परमानंद तिवारी को सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।