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रूट डायवर्जन : सिर्फ एक बस लखनऊ के लिए निकली, 101 के पहिये थमे

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रोडवेज बस्ती डिपो में खड़ी बसें संवाद - फोटो : credit
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बस्ती। कांवड़ यात्रा के चलते रूट डायवर्जन का सबसे ज्यादा असर परिवहन निगम की बस सेवाओं पर पड़ा है। वैकल्पिक मार्ग से बसों के संचालन की योजना भी कांवड़ियों की भीड़ और जगह-जगह रोकटोक के कारण सफल नहीं हो सकी।
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सोमवार को निगम की 102 बसों में से सिर्फ एक बस लखनऊ के लिए रवाना हो सकी, जबकि 101 बसें डिपो में खड़ी रहीं। तीन दिनों से प्रभावित बस संचालन के कारण निगम को करीब 25 से 30 लाख रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।
बसों का संचालन प्रभावित होने से यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों या ट्रेनों का सहारा लेना पड़ा। बस सेवाएं प्रभावित रहने से चालक-परिचालक भी परेशान रहे। परिवहन निगम के अनुसार बस्ती डिपो के बेड़े में 102 बसें हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान पिछले तीन दिनों से बस सेवाएं प्रभावित हैं। सोमवार को लखनऊ, दिल्ली, कानपुर, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, डुमरियागंज और अंबेडकरनगर समेत कई रूटों पर बसों का संचालन बाधित रहा।
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वैकल्पिक मार्ग से बसों के संचालन में दूरी बढ़ने से यात्रियों पर अतिरिक्त किराये का भार भी पड़ रहा है। यही वजह है कि यात्रियों ने बसों की अपेक्षा ट्रेनों का रुख किया। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या बढ़ने का एक कारण बस सेवाओं का प्रभावित होना भी बताया जा रहा है।
दो वैकल्पिक रूट भी नहीं आए काम : पिछले साल कांवड़ यात्रा के दौरान बसों को मनौरी-डुमरियागंज मार्ग से बेंवा, उतरौला, गोंडा, जरवल रोड और बाराबंकी होते हुए लखनऊ भेजा गया था। दूसरा विकल्प कलवारी-टांडा होते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का था। इस बार दोनों वैकल्पिक मार्गों पर भी जाम और रोकटोक की स्थिति बनी हुई है। जगह-जगह वाहनों को रोके जाने के कारण निगम प्रबंधन बसों को इन मार्गों पर भेजने से बच रहा है।
एआरएम कल्पना श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार को रोकटोक अधिक होने के कारण सिर्फ एक बस लखनऊ भेजी जा सकी। बाकी बसों को डिपो में खड़ा रखना पड़ा। निर्धारित वैकल्पिक मार्गों पर भी आवागमन सामान्य नहीं है।
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