उमरिया रिंगबाध के निकट कटान की रोकथाम के लिए मरम्मत कार्य करते श्रमिक। स्रोत- बाढ़ खंड
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बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर एक बार फिर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। जलस्तर घटने से ग्रामीणों को पानी के दबाव में कमी आने पर थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन तटबंधों पर दबाव बना हुआ है। विक्रमजोत क्षेत्र के लकड़ी पांडेय, पकड़ी संग्राम, लकड़ी दूबे, अर्जुनपुर समेत आसपास के 8-10 गांवों में नदी की कटान जारी है। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार सोमवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.46 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान 92.73 मीटर से 27 सेंटीमीटर नीचे है। विक्रमजोत क्षेत्र में सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 92.59 मीटर था, जो शाम चार बजे घटकर 92.46 मीटर हो गया। जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। विक्रमजोत क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर घटने के बाद कई स्थानों पर कटान तेज हो जाती है।
लकड़ी पांडेय, पकड़ी संग्राम, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत आसपास के गांवों में कृषि योग्य भूमि नदी की धारा में समा रही है। आबादी वाले इलाकों पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीण मवेशियों और जरूरी सामान को लेकर सतर्क हैं।
उमरिया रिंग बांध के पास भी कटान : दुबौलिया। नदी का जलस्तर कम होने से सुबिका बाबू और आंशिक टेढ़वा गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी नहीं हुई तो कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो सकती है। हालांकि गांव में अभी भी पानी भरा है और दैनिक जरूरतों के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। उमरिया रिंग बांध के पास कटान होने से बाढ़ खंड की टीम मरम्मत कार्य में जुटी है। कटान रोकने के लिए परक्यूपाइन लगाए जा रहे हैं।
माझा अशोकपुर गांव के दक्षिण में कृषि योग्य भूमि धीरे-धीरे नदी की धारा में समा रही है। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा तक करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में नदी का दबाव बना हुआ है।