बस्ती। निजी बसें और डग्गामार वाहन परिवहन निगम को रोजाना ढाई से तीन लाख रुपये की चपत लगा रहे हैं। रोडवेज बसों के रंग में रंगी तमाम निजी बसों से यात्रियों को ढोया जा रहा है। इसका खमियाजा परिवहन निगम को भुगतान पड़ रहा है। कई निजी बसें और डग्गामार वाहन बिना परमिट और फिटनेस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार इन पर नकेल कसने के बजाय मूकदर्शक बन गए हैं।
रोडवेज डिपो परिसर के आसपास ही कई डग्गामार वाहनों का जमावड़ा रहता है। वहीं, शहर के कंपनीबाग, फौव्वारा तिराहा, कचहरी, बड़ेवन, मूड़घाट चौराहे पर डग्गामार वाहनों और निजी बसों की कतार रहती है। यही हाल मनौरी, पालीटेक्निक, हड़िया, फुटहिया, हर्रैया, मनौरी चौराहे का भी है। इससे निगम को माह में लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि निगम 20 फीसदी कम किराये के साथ जनता बस सेवा का संचालन कर रहा है। मगर, निगम और विभाग में आपसी तालमेल की कमी कहें या फिर ढिलाई इसका फायदा उठाने में डग्गामार संचालक सफल हो जा रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि तमाम बसें ऐसी हैं जो रोडवेज बसों के रंग में रंगी होती हैं। हाईवे से गुजरती हैं और लखनऊ, अयोध्या, खलीलाबाद, नंदौर, सेमरियवां, टोल प्लाजा आदि जगहों की सवारियां लेकर फुर्र हो जाती हैं। एआरएम आयुष भटनागर ने बताया कि डिपो के आसपास और अनाधिकृत रूप से टैक्सी स्टैंडों पर खड़े होने वाले वाहनों को हटाने के लिए परिवहन विभाग को पत्र लिखा गया है। जल्द ही अभियान चलेगा।
उन्होंने माना है कि इन डग्गामार वाहनों के चलते रोजाना ढाई से तीन लाख का नुकसान होता है। प्रभावी कार्रवाई होने पर इस पर अंकुश लगाया जा सकेगा। आय प्रभावित हो रही है। बताया गया कि वर्तमान में 11 से 12 लाख रुपये ही आय प्राप्त हो रही है, जबकि 17 से 18 लाख रुपये रोजाना इनकम का लक्ष्य है।
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बस्ती डिपो पर एक नजर
निगम बसों की संख्या : 103
अनुबंधित बसों की संख्या : 34
चयनित मार्ग : 65
कोट
बिना परमिट और अनाधिकृत रूप से राष्ट्रीयकृत मार्ग पर संचालित हो रहे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। निगम की बसों के रंग की बसों का संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-फरीउद्दीन, आरटीओ, बस्ती।