बस्ती। बस्ती। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के साथ ही विक्रमजोत क्षेत्र में कटान तेज हो गई है। भौसिया, कंहईपुर और रैदासपुर गांवों के पास नदी तटबंध की ओर बढ़ते हुए बीडी तटबंध से महज 20 से 25 मीटर की दूरी तक पहुंच गई है। कटान की जद में आकर सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि नदी में समा चुकी है। तटबंध के करीब पहुंचती नदी को देखकर ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी बचाव कार्य नहीं कराया गया तो कटान तटबंध तक पहुंच सकती है, जिससे आसपास के गांवों पर भी बाढ़ का खतरा मंडराने लगेगा। कंहईपुर निवासी सूरजपाल तथा भौसिया के राजू सिंह और कुंवर सिंह ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा एवं कटानरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई उपजाऊ भूमि लगातार नदी में समाती जा रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है।
उधर, बाढ़ खंड के अवर अभियंता अतुल कुमार ने बताया कि कटान प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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लाल निशान की ओर बढ़ रहा सरयू का जलस्तर
दुबौलिया। सरयू नदी का जलस्तर रुक-रुककर बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या के अनुसार बुधवार शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 92.01 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 72 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि नदी चेतावनी बिंदु 91.73 मीटर से 24 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। माझा क्षेत्र में नदी का फैलाव लगातार बढ़ रहा है। पशुपालकों को नाव के सहारे पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करनी पड़ रही है। सुबिका बाबू, टेढ़वा समेत कई गांवों के लोगों का कहना है कि यदि जलस्तर में और वृद्धि हुई तो गांवों में पानी घुसने की आशंका बढ़ जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार करीब 50 से अधिक परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा खड़ा हो सकता है। संवाद
लोग बोले-
हमारा घर बहुत पहले कटान की चपेट में आकर सरयू नदी में समाहित हो गया था। अब सुरक्षित स्थान पर घर बनवा कर रहे है। आजीविका का साधन खेती ही है। जाे माझा में है। बाढ़ के चलते दोनों फसल तैयार नहीं कर पाते है।
-राजेंद्र राजभर, माझा देवारागंगबरार।
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मेरा गांव कटान के मुहाने पर आ गया है। इस वर्ष बाढ़ खंड ने गांव को बचाने के लिए डैंपनर का निर्माण कराया है। बावजूद इसके गांव सुरक्षित नहीं है। यदि कटान हुई तो गांव के अस्तित्व पर संकट छा जाएगा।
-राम प्रीत, मोजपुर।
कोटबाढ़ के दृष्टि से विक्रमजोत और कुदरहा ब्लॉक के कुछ गांव काफी संवेदनशील है। वहां निगरानी बढ़ा दी गई है। जरूरत के हिसाब से बचाव कार्य भी कराए जा रहे हैं। तटबंध अभी सभी जगहों पर सुरक्षित है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड।