विक्रमजोत। अयोध्या रिंग रोड के निर्माण के दौरान एक दर्जन गांवों की जलनिकासी और आवागमन के लिए अंडरपास की व्यवस्था नहीं बन पाने से ग्रामीण नाराज है। बुधवार को ग्रामीणों ने फिर से निर्माण कार्य रुकवा दिया।
इस दौरान प्रदर्शन भी किया। कार्य स्थल पर एनएचएआई के जनसंपर्क अधिकारी भी पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें पहले से तैयार प्रस्ताव के मुताबिक सड़क निर्माण के बाद भविष्य की समस्याएं गिनाई। उन्हें ज्ञापन भी सौंपा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि विक्रमजोत विकास क्षेत्र के फोरलेन नेशनल हाईवे पर स्थित रमघटिया से अयोध्या को जोड़ने वाली निर्माणाधीन रिंग रोड जमीन की सतह से आठ फिट ऊंची बन रही है, जिससे रिंगरोड से सटे एक दर्जन गांवों के लिए यह सड़क बांध की तरह साबित होगी।
बरसात के दिनों में जलभराव का संकट गहरा जाएगा। पानी का बहाव न होने से आसपास के गांवों में जलभराव की समस्या बनी रहेगी। अभी निर्माण का शुरुआती दौर में है। यदि इस समस्या का स्थाई समाधान नहीं होगा तो बाद में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा।
इसके अलावा ग्रामीणों के आवागमन के लिए रिंगरोड में अंडरपास भी नहीं बनाया जा रहा है। जबकि कार्यदायी संस्था को निर्माण से पहले इन समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए था। ग्रामीणों ने कहा कि जलनिकासी के लिए निर्माण के दौरान कोई स्थाई उपाय नहीं किया जा रहा है।
इससे धिरौली पांडेय, रायपुर, रैदासपुर, विक्रमजोत, छतौना, संदलपुर, नेतवर पट्टी सहित एक दर्जन गांवों की जलनिकासी ठप हो जाएगी। बारिश में हम लोगों को बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा। बताया कि रिंग रोड के दोनों तरफ के गांवों को जोड़ने के लिए अंडरपास भी नहीं बनाया जा रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय आवागमन बंद हो जाएगा। गांव के मनोज कुमार सिंह, बुधई, राम लखन यादव, रामसुख, शैलेंद्र सिंह, हरीराम वर्मा, सुदर्शन यादव, जगदीश, रामपाल, अनिल कुमार सिंह, रामकिशोर वर्मा, इंद्रनाथ उपाध्याय, सम्मय दीन गुप्ता, रामनाथ, बबलू निषाद, भोलानाथ आदि ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के जनसंपर्क अधिकारी सुनील कुमार तिवारी को इस आशय का ज्ञापन सौंपा।
कहा कि रिंग रोड पर कम से कम दो स्थानों पर अंडरपास व चार स्थानों पर जल निकासी के लिए आवश्यक बकेटपास की व्यवस्था की जाए। कार्यदायी संस्था की ओर से समस्या के निदान के लिए दो दिन का समय मांगा गया है।
जनसंपर्क अधिकारी सुनील कुमार ने बताया ग्रामीणों की समस्या पर उच्चाधिकारी लगातार विमर्श कर रहे हैं। जल्द ही समाधान निकला जाएगा।