बस्ती। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को निजी अस्पताल या प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सक को तत्काल दिखाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है।
नियमित इलाज करने वाले चिकित्सक भी इमरजेंसी के नाम पर मोटी रकम वसूल कर रहे हैं। इमरजेंसी शब्द का इस्तेमाल करते ही उनकी फीस दोगुनी हो जा रही है। इसके बाद मरीज के तीमारदारों को जांच, दवा आदि का खर्च अलग से वहन करना पड़ रहा है।
रंजीत चौराहे के पास एक निजी अस्पताल में पहुंचे डुमरियागंज के शौकत अली ने बताया कि उनकी पत्नी के पेट में ज्यादा दर्द हो रहा था। सोचा कि बस्ती चलकर उन्हें नियमित देखने वाले चिकित्सक से तत्काल परामर्श ले लें। वैसे तो उनकी सामान्य फीस 500 रुपये हैं। लेकिन, जैसे ही इमरजेंसी में दिखाने की बात की नंबर लगाने वाला कर्मचारी 800 रुपये फीस वसूल कर ली। इस पर भी नंबर दिन में 11 बजे के बाद का दिया गया।
वहीं रुधौली से आई परमिला ने बताया कि इमरजेंसी फीस देने के बाद डॉक्टर से मिलने के लिए तीन से चार घंटे इंतजार करना पड़ता है। अस्पताल से जुड़े एक कर्मचारी ने बताया कि प्रतिदिन सामान्य फीस पर 80 मरीजों का नंबर लगता है। 11 बजे से डॉक्टर देखना शुरू करते हैं, जिन्हें जल्दी दिखाना होता है वह इमरजेंसी फीस देकर नंबर लगाते हैं।