बस्ती। कोडीनयुक्त कफ सिरप के काले धंधे की नींव लॉकडाउन के दौरान ही पड़ गई थी। उस समय शराब बंदी थी तो लोगों ने इसे विकल्प के रूप में चुन लिया। इसके बाद यह धंधा परवान चढ़ता गया। इससे बस्ती भी अछूता नहीं रहा। धीरे-धीरे इस काले धंधे का बस्ती भी हब बन गया।
सूत्र बताते हैं कि नेपाल हिंसा से पहले बस्ती से कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेप वहां भेजी गई थी। पुलिस को यह इनपुट मिलते ही जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। कोडीनयुक्त कफ सिरप के धंधेबाजों पर ईडी की छापेमारी के बाद यहां की पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। गणपति फार्मा के संचालक की तलाश के लिए सर्विलांस सेल काे लगाया गया है, मगर वह भी लोकेशन ढूंढने में नाकाम साबित हो रहा है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि गणपति फार्मा को घेरने के लिए पुलिस उनके नात-रिश्तेदारों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि नाते-रिश्तेदार परेशान होंगे तो संचालक बिल से बाहर आ जाएगा। वहीं गणपति फार्मा को कोडीनयुक्त कफ सिरप आपूर्ति देने वाले बस्ती चार अन्य फर्म संचालक भी लापता हैं। पता चला है कि इन चार ने रांची और लखनऊ से कोडीनयुक्त कफ सिरप की खरीदारी कर गणपति फार्मा को आपूर्ति दी थी। इनके संचालकों का भी अता-पता नहीं हैं। पुलिस इन्हीं पांचों फर्म संचालकों को पकड़ने का जाल बिछा रही है। यदि एक भी हत्थे आ गया तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो जाएगा।
गुनगुना नशा में रखता है कोडीन युक्त सिरप : कोडीन युक्त सिरप की लत शराब जैसी होती है। जानकार बताते हैं कि एक शीशी कोडीन युक्त सिरप पीने पर गुनगुना नशा चढ़ता है। वीआईपी कल्चर में रहने वाले लोग भी इस सिरप का नियमित सेवन करते हैं। इसे पीने के बाद आसपास मौजूद लोगों से बातचीत करने में गंध नहीं आती है।
अंदर गुनगुना नशा भी बना रहता है। कई लती तो ऐसे हैं जो दिन भर में कई बार इस सिरप का इस्तेमाल करते हैं।