संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल और उत्तर पूर्वी राज्यों को जोड़ने वाला अयोध्या-गोरखपुर हाईवे पर बार-बार यातायात डायवर्जन से लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। ऐसा एक-दो दिन के लिए हो तो कोई एतराज नहीं। मगर, 10-12 दिन तक लगातार डायवर्जन होने से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
खासकर ट्रांसपोर्टर, ट्रक चालक, निजी बस ऑपरेटर एजेंसियों और व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय से गंतव्य तक माल नहीं पहुंच पा रहा है। भाड़ा भी ज्यादा देना पड़ रहा है। आवागमन के लिए लोगों को बस-टैक्सी भी समय से नहीं मिल पा रही है। वैकल्पिक मार्ग से जाने पर डीजल और टोल का खर्च कई गुना बढ़ जाता है।
इसलिए ऐसे रूट से जाने की जगह ज्यादा ट्रक चालक गाड़ी खड़ी करने में भलाई समझ रहे हैं। तीन माह के भीतर पांच बार फोरलेन डायवर्जन हो चुका है। दीपावली के दौरान दीपोत्सव के लिए दो दिन डायवर्जन था। इसके बाद अयोध्या परिक्रमा, कार्तिक पूर्णिमा, महाकुंभ मेला, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी पर डायवर्जन लागू रहा।
बृहस्पतिवार को साढ़े 11 घंटे आवागमन खोलने के बाद रात 11 बजे से फिर 14 फरवरी की रात 11 बजे तक डायवर्जन लागू कर दिया गया। इससे एक बार फिर आवागमन बाधित हो गया।
वाहनों के रास्ता बदलने से हाईवे के किनारे के व्यावसायियों का रोजगार ठप पड़ गया है। खासकर ढाबों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। ढाबा संचालक मंजेश ओझा बताते हैं कि उनके यहां 25-30 स्टाफ हैं, उनका खर्च तक नहीं निकल पा रहा है।
प्रतिदिन 20 से 25 हजार े का खर्च आ रहा है। कमाई पांच हजार भी नहीं हो रही है। ट्रांसपोर्टर अशोक कुमार द्विवेदी बताते हैं कि फोरलेन पर डायर्वन से ज्यादा नुकसान हो रहा है।