संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। समूचे शहर की बात छोड़िए, गांधीनगर मार्ग को भी अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया जा सका। प्रशासनिक अधिकारी एवं नगर पालिका की टीम पिछले माह कई बार मुख्य बाजार में सड़क को खाली कराने के लिए उतरी।
चेतावनी के साथ छिटपुट अतिक्रमण पर कार्रवाई भी हुई। सड़क के दोनों तरफ लाल निशान लगाकर फुटपाथ का हद बनाया गया। मगर, इसका दीर्घकालिक असर देखने को नहीं मिला। अब स्थिति बिल्कुल पहले जैसी है। सड़क तक दुकानों का कब्जा है और शहर जाम में उलझा हुआ है।
शहर में फुटकर बाजार की सबसे अच्छी रौनक गांधीनगर क्षेत्र में देखने को मिलती है। कुछ खरीदारी करना हो या कारोबार पहली ख्वाहिश लोगों की गांधीनगर ही रहती है। यहां कपड़ा से लेकर आभूषण और अनाज से लेकर रेस्टोरेंट, मिठाई- शृंगार आदि कारोबार में शहर के अलावा गोरखपुर-लखनऊ तक के व्यापारियों का प्रतिष्ठान है। मंडल मुख्यालय के इस मुख्य बाजार में महानगरों की तरह बड़े-बड़े शोरूम तो बने हैं। मगर, सड़क और फुटपाथ सुव्यवस्थित नहीं हो सका।
बाजार में पैदल चलने के लिए गलियारा नहीं है। इंटरलॉकिंग फुटपाथ है। मगर, उस पर कब्जा है। फुटपाथ और दुकान के बीच नाले पर ढक्कन रखकर वह भी कब्जा कर लिया गया है।
गलियारा न होने से आम ग्राहक सड़क से उतर एक दुकान पर पहुंचते है और उसी लाइन की अन्य दुकानों पर जाने के लिए फिर मुख्य सड़क पर आते हैं। इस तरह पैदल चलने वालों का भी पूरा दबाव सड़क पर है।
हनुमानगढ़ी, पक्के पुलिस बूथ, शौकत गली, बाटा गली, पाठक जी की कोठी, रामप्रसाद गली, साहू मार्केट आदि जगहों पर फुटपाथ कब्जे में है। सड़क पर भीषण जाम में वाहनों की लंबी कतार रहती है। बाजार में खरीदारी करने आए लोग वाहनों के बीच में इधर से उधर होने के लिए जगह बनाते हैं।
शरीर संभालते हुए लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर एक-एक कदम साध रहे हैं। दीपावली, होली, धनतेरस, ईद-बकरीद जैसे बड़े पर्वों पर यहां पैर रखने की जगह नहीं मिलती है।
नगर पालिका ने अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए गांधीनगर क्षेत्र का ही चयन पहले किया। यहां बुलडोजर के साथ प्रशासनिक टीम कई बार उतरी। लोगों के कब्जे से कुछ हद तक फुटपाथ खाली कराया गया। इसके बाद फिर अतिक्रमण का बोलबाला हो गया।