- लैब से नमूने लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा हायर सेंटर
- नदियों में छोड़ा जा रहा पानी ठीक है जांची जाएगी गुणवत्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर में लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्लांट की स्थापना की गई है। इस तरल अपशिष्ट शोधन संयंत्र (एफएसटीपी प्लांट) में शहर के शौचालयों का गंदा पानी साफ कर उसको उपयोग में लाया जा रहा है। लेकिन, पानी का ठीक प्रकार से ट्रीट हो रहा कि नहीं उसकी गुणवत्ता जांचने के लिए स्टेट टीम बस्ती आएगी। यहां लैब से नमूने लेगी और जांच के लिए हायर सेंटर भेजेगी।
बता दें कि अमहट के पास 4.43 करोड़ की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट बना है। पहले शौचालयों का गंदा पानी नदियों में या फिर इधर-उधर गिरा देते थे। इससे स्वच्छता को खतरा और वायुमंडल दूषित होता था। अब प्लांट बनने से अधिकतर शौचालयों की गंदगी का ट्रीट यहीं पर किया जा रहा है। यहां से निकला पानी उद्यानों में जबकि खाद को खेत में किसान ले जाकर कर रहे हैं।
एफएसटीपी प्लांट बना देने से करीब एक साल से शौचालयों की गंदगी का ठीक से ट्रीट हो पा रहा है। शहर के अधिकतर शौचालयों से निकले गंदगी को ट्रीटमेंट किया जा रहा है वहीं शहर के शौचालय के पानी को भी एफएसटीपी संयंत्र से ट्रीटमेंट कर उसके पानी का उपयोग में ला रहे। इस पानी से सिंचाई हो सकेगी। यही नहीं यहां से शेष बचे पानी को शहर के विभिन्न मार्गों के डिवाइडर में लगे पौधों एवं अन्य उद्यानों में भी उपयोग किया जा रहा है।
इससे उस बेशकीमती पानी को भी बचाया गया है जो पेयजल के उपयोग में लाया जाता है। अब उस पानी की गुणवत्ता के लिए लैब से सैंपलिंग के लिए टीम आएगी। जांच में उसकी गुणवत्ता जांची जाएगी। ईओ नगर पालिका बस्ती सत्येंद्र सिंह का कहना है कि नगर पालिका के अधीन संचालित प्लांट की गुणवत्ता के लिए सैंपलिंग होगी। इससे पता चलेगा कि पानी ठीक से ट्रीट हो रहा कि नहीं।
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22 हजार हैं मकान
शहर में लगभग 22 हजार मकान हैं। वहीं व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी अत्यधिक हैं। यहां के शौचालय भरने के बाद मशीन से इसे खींच लिया जाता है और विशेष टैंकर से अमहट स्थित लगे एफएसटीपी संयंत्र में ले जाया जाता है जहां पानी ट्रीटमेंट होकर पूरी तरह साफ हो जा रहा है। इस पानी का उपयोग उद्यान में सिंचाई के उपयोग में लाया जा रहा है।