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Basti News: सहालग में सेहत से खिलवाड़ की तैयारी

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पनीर की फोटो।
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बस्ती। सहालग नजदीक आते ही मिलावट के धंधेबाज भी सक्रिय हो गए हैं और लोगों के सेहत से खिलवाड़ की तैयारी शुरू कर दी गई है। बाजार में खोआ, पनीर और मिठाइयों की मांग बढ़ गई है। मंडी में कानपुर, नवाबगंज और मथुरा से खोआ और अयोध्या-आंबेडकरनगर से पनीर की आपूर्ति हो रही है।
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बताया जा रहा कि सहालग और होली के सीजन में 200 क्विंटल खोआ की रोजाना डिमांड रहेगी। इसके लिए पहले से ही ऑर्डर दे दिए गए हैं। इस साल फरवरी से खूब शादियां हैं। इस महीने में पांच फरवरी से लगन खुल रही है और 26 फरवरी तक है। मैरिज हॉल, होटल, कुक के अलावा पनीर, मिठाई एवं अन्य खाद्य सामग्रियों की बुकिंग हो चुकी है।
इस वजह से बाजार में खोआ का डिमांड बढ़ गया है। बस्ती में कानपुर और नवाबगंज से खोआ की खेप पहुंचाई जा रही है। जबकि रेडीमेड पनीर अयोध्या, बाराबंकी और आंबेडकर नगर जिले से मंगाया जा रहा है।
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धंधेबाज पिकअप से खोआ-पनीर मंगवा रहे हैं। इन सामग्रियों से लदे वाहन ज्यादातर भोर से पहुंचना शुरू हो रहे हैं। रास्ते में पुलिस को चकमा देने के लिए कई ढुलाई वाहनों पर दुग्ध डेयरी के नाम के स्लोगन लिखवा दिए गए हैं। खोआ-पनीर के कारोबार से जुड़े विनोद कुमार ने बताया कि फरवरी में लगन बहुत तेज है। कुछ दिनों के लिए तो अब ऑर्डर लेना बंद कर दिए है।
हर शादी में खाने में पनीर और मिठाई में छेना और खोआ से बनी मिठाई की डिमांड रहती है। इस बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए मंडी में दुकानदारों ने एडवांस बुकिंग ले रखी है। कई धंधेबाज इसका फायदा उठा रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए मिलावटी खोआ-पनीर बाहर से मंगाया जाता है। धंधेबाजों का पूरा नेटवर्क सीजन आते ही सक्रिय हो जाता है। शहर से लेकर ग्रामीण कस्बे तक इसकी सप्लाई की जाती है। लिवर पर पड़ता है प्रभाव : जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी ने बताया कि मिलावटी खोआ और पनीर में इस्तेमाल किए गए रसायन और सिंथेटिक पदार्थ पाचन तंत्र को कमजोर करते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों में दस्त, उल्टी, पेट दर्द और गैस एसिडिटी की शिकायत तेजी से बढ़ जाती है।
वनस्पति घी और रिफाइंड ऑयल की अत्यधिक मात्रा शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती है, इससे दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं सिंथेटिक जमावट एजेंट और डिटर्जेंट जैसे रसायनों से बने पनीर से किडनी व लिवर पर सीधा दुष्प्रभाव पड़ता है।
बेसन और मसाले में भी मिलावट : धंधेबाज बेसन और मसाले में भी मिलावट का खेल खूब चल रहा है। बड़े किराना दुकानदारों के यहां सस्ते दर पर बोरी में बेसन और मिलावटी मसाले की सप्लाई की जा रही है। पिसे मसाले में रंग आदि की मिलावट की जा रही है। इसके अलावा चना बेसन में मटर का बेसन मिलाकर बेचा जा रहा है। यहां तक कि शॉपिंग मॉल में बिकने डिब्बा बंद लड्डू और रसगुल्ला भी भरोसेमंद नहीं है।
मिठाई के कारोबारी राजन गुप्ता ने बताया कि शुद्ध बेसन से बना लड्डू हल्का पीले रंग का होता है। कई दुकानदार इसे चमकदार और कई रंग का बनाने के चक्कर में जहरीला बना रहे हैं। लड्डू को रंगीन बनाने के लिए इसमें टर्टाजीन के अलग-अलग रंग मिलाए जाते हैं। 10 किलोग्राम लड्डू बनाने में करीब 100 ग्राम कलर का प्रयोग होता है। यह रंग सीधे तौर पर लीवर को प्रभावित करता है। बताया कि सहालग में इस लड्डू की मांग बहुत अधिक रहती है।
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