लालगंज। महर्षि उद्दालक मुनि की तपोभूमि और कुआनो-मनवर संगम पर इस वर्ष भी पांच दिवसीय मेले आयोजन 13 अप्रैल से होगा। इस मेले में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं और बड़े व्यापारी आते हैं। मेले की तैयारी शुरू हो गई है
पौराणिक मान्यता के अनुसार, यहां मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम ने अनुज लक्ष्मण और माता सीता के साथ लिट्टी चोखे का सेवन कर रात्रि विश्राम किया था। संगम में स्नान कर बाबा मोक्षेश्वर नाथ की पूजा अर्चना की थी। मान्यता है कि इस संगम तट पर स्नान करके दान देने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा से एक दिन पूर्व चतुर्दशी शाम को चारों घाटों पर दूर दराज आए श्रद्धालु लिट्टी चोखे का सेवन कर सुबह स्नान दान करते हैं।
चैत्र पूर्णिमा से शुरू होने वाले इस मेले में शामिल होने के लिए दूर-दूर से व्यापारियों का जमावड़ा होने लगा है। इस संगम तट पर बाबा मोक्षेश्वर नाथ का एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। चैत्र पूर्णिमा,परेवा और द्वितीया के मेले का अपना विशेष महत्व है। इन तीनों दिन दूर-दूर से आए हुए श्रद्धालु कुआनो मनवर संगम में स्नान करके दान दान पुण्य करते हैं। मेले का आयोजन ग्राम पंचायत और व्यापार मण्डल के सहयोग से किया जा रहा है। ग्राम पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी गुप्ता, वीरेंद्र कुमार बबलू, सुरेंद्र कुमार गुप्ता,रघुनंदन सैनी सुभाष चंद्र अग्रहरि, ओम प्रकाश वेद प्रकाश ने बताया कि मेले में व्यापारियों, दुकानदारों की सुविधा का पूरा खयाल रखा जा रहा है।