संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शब-ए-बरात पर मंगलवार रात को मुस्लिम समाज के लोगों ने मस्जिदों में रहकर पूरी रात अल्लाह की इबादत की। इसके साथ ही अपने गुनाहों से तौबा करते हुए अमनचैन की दुआएं मांगी। लोगों ने विशेष नमाज अदा कर सभी के लिए मगफिरत मांगी। इस दौरान मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। दूसरी तरफ कब्रिस्तान में पहुंचकर लोगों ने अपने अजीज व करीबियों की कब्र पर फातेहा पढ़कर उन्हें याद किया।
शब-ए-बरात पर मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों में काफी चलह-पहल रही। इस दौरान लोगों के घरों में विशेष पकवान हलवा आदि बनाया गया और अपने बुजुर्गों, वालिदैन को याद किया।इस्लाम में शब-ए-बरात का विशेष महत्व है। अरबी माह शाबान की 14 तारीख को यह त्योहार होता है। धार्मिक किताबों में कहा गया है कि इस रात हर शख्स के गुनाह और नेकी का लेखाजोखा होता है। अल्लाह शख्स की नेकी के हिसाब से सजा और माफी देते हैं।
जामिया हनफिया, गांधी नगर के मौलाना रियाज अहमद का कहना है कि इस रात में अल्लाह अपने बंदों को माफी का अवसर प्रदान करते हैं। अगर सच्चे दिल से कोई तौबा करता है तो अल्लाह पाक उसके गुनाहों को माफ कर देते हैं, और वह जन्नत का हकदार हो सकता है।
उन्होंने बताया कि जामिया हनफिया में इस रात को विशेष नमाज पढ़ी जाती है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसके बाद देश में अमन, खुशहाली व सलामती के लिए दुआएं मांगी जाती हैं। शहर के जिला अस्पताल स्थित कर्बला, गांधी नगर कब्रिस्तान, मुरलीजोत, नरहरिया, स्टेशन रोड, मूड़घाट स्थित कब्रिस्तान में शाम से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। यहां पहुंचकर लोगों ने फातेहा पढ़ा।
इस अवसर पर कब्रिस्तानों की सफाई की गई, तथा वहां प्रकाश की भी व्यवस्था की गई। शब-ए-बरात पर लोगों ने दरगाहों पर भी पहुंचकर अकीदत का नजराना पेश किया। जिला अस्पताल स्थित दरगाह, अमहट घाट स्थित दरगाह, मुरलीजोत, पांडेय बाजार सहित अन्य जगहों पर देर रात तक लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।
हुसैनी मस्जिद के इमाम मौलाना अली हसन ने बताया कि आज की यह शब हमारे लिए दोहरी खुशी लेकर आती है। 15 शाबान को पैगंबर साहब के आखिरी नायब इमाम मेंहदी का जन्म हुआ है।