पांच साल से फरार प्रमिला बाई हरिद्वार से गिरफ्तार
- संत कुटीर आश्रम प्रकरण में थी वांछित
- एसटीएफ लखनऊ की मदद से कोतवाली पुलिस ने किया गिरफ्तार
- हापुड़ जिले के कोतवाली की रहने वाली है
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बहुचर्चित संतकुटीर आश्रम डमरुआ कांड में पांच साल से फरार चल रही प्रमिला बाई उर्फ पारुल गोयल को एसटीएफ लखनऊ की मदद से पुलिस ने हरिद्वार (उत्तराखंड) से गिरफ्तार कर लिया है।
कोतवाली में प्रमिला बाई के खिलाफ गैंगरेप समेत अन्य धाराओं में दो मुकदमे दर्ज हैं। उसे बस्ती लाने के बाद बृहस्पतिवार को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
एसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रभारी निरीक्षक कोतवाली राधेश्याम राय की अगुवाई में एसआई राकेश कुमार मिश्र व एसटीएफ लखनऊ के एसआई मनोज सिंह की टीम ने उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कोतवाली गंगनहर रुड़की थाना क्षेत्र के गीतांजली विहार गणेशपुर के पास से प्रमिला बाई को गिरफ्तार किया है। 2017 में बस्ती कोतवाली में गैंगरेप, साजिश रचने समेत अन्य धाराओं में दो मुकदमों वह वांछित चल रही थी। उस पर पचास हजार रुपये का इनाम रखा गया था। संतकुटीर आश्रम के महंत स्वामी सच्चिदानंद उर्फ दयानंद की शिष्या प्रमिला बाई उर्फ पारुल गोयल रघुवीरगंज थाना कोतवाली जनपद हापुड़ की निवासी है।
बता दें कि, संतकुटीर आश्रम डमरुआ बस्ती में छत्तीसगढ़ से लाई गई दो साध्वियों ने 19 दिसंबर 2018 को आश्रम के महंत सच्चिदानंद उर्फ दयानंद और उसके सहयोगियों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराज्ञानंद, प्रमिला बाई, कमला बाई पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। कोतवाली पुलिस ने 26 दिसंबर 2018 को एक और साध्वी की तहरीर पर सच्चिदानंद के विरुद्ध यौन शोषण का मुकदमा दर्ज किया था। इसमें प्रमिला बाई, कमला बाई, उर्मिला बाई और ध्यान बाई को भी आरोपित बनाया गया था। इन सभी पर आरोप था कि यौन शोषण के मामले में वह महंत का सहयोग करती थीं। बिहार, दिल्ली, मुंबई समेत कई राज्यों में बाबा सचिदानंद व उसके सहयोगियों की तलाश हुई। जुलाई 2021 में सच्चिदानंद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस व एसटीएफ प्रमिला बाई की तलाश में जुट गई थी। कोतवाल राधेश्याम राय के अनुसार उत्तराखंड हरिद्वार में 26 जनवरी को एसटीएफ व पुलिस की टीम ने नाम बदलकर रह रही प्रमिला को दबोच लिया।