गांधीकला भवन के पास टूटे बिजली का तार ठीक करते लाइन मैन।
- फोटो : रमेश मिश्र
बस्ती। शहर में जुगाड़ के सहारे टिकी बिजली सप्लाई व्यवस्था रविवार को भी अस्त-व्यस्त रही। एक ओर जहां कई मोहल्ले आपूर्ति बहाल न होने से अंधेरे में डूबे रहे। वहीं एक तिहाई शहर में लो-वोल्टेज की पहले से चली आ रही समस्या ने विकराल रूप ले लिया। इसके चलते बिजली से चलने वाले तमाम घरेलू उपकरण नहीं चले। पानी के लिए भी हैंडपंप का सहारा लेना पड़ा। जिससे लोगों की आम दिनचर्या प्रभावित हुई। भीषण गर्मी के बीच करंट का यह झटका शहरियों पर भारी पड़ने लगा है।
शुक्रवार रात से शनिवार दोपहर तक बिजली गुल रहने से लोग खासे परेशान रहे। दोपहर बाद सप्लाई शुरू भी हुई तो लो-वोल्टेज की दिक्कत ने बड़ा रूप ले लिया। सबसे ज्यादा समस्या उन मुहल्लों की है,जहां बांस-बल्ली के सहारे सप्लाई की गई है। मसलन भूअर निरंजनपुर, पिकौरा बख्श, मड़वानगर, मिल्लत नगर, तुरकहिया के पीछे नई बस्ती, पुराना डाकखाना मोहल्ले के रहने वाले लो-बोल्टेज की समस्या सबसे ज्यादा है।
इन मुहल्लों में पहले से ही यह समस्या बरकरार है मगर शुक्रवार रात आंधी-पानी के बाद स्थिति काफी खराब हो गई।
कूलर,पानी का मोटर सब बंदः जिन कामकाजी लोगों ने रविवार के दिन परिवार के साथ वक्त बिताने का प्लान बनाया था,उन्हें बिजली के चलते निराश होना पड़ा। लो-वोल्टेज की दिक्कत के चलते जबरदस्त गर्मी से पार पाने के उपाय फेल हो गए। क्योंकि वाल्टेज कम होने सेन तो एसी-कूलर चल सके न ही पानी का पंप ही चला।
नई कोलोनियों की हालत खस्ताः रोजाना आकार बढ़ा रहे शहर की नई कालोनियां बिजली की समस्या से सबसे ज्यादा जूझ रही हैं। चाहे मड़वानगर की बात हो या भूअर निरंजनपुर व बेलगड़ी के बीच बस रही नई बस्ती का मामला हो। यहां तक कि पिकौरा बख्श, मड़वानगर, मिल्लत नगर, तुरकहिया के अलावा सेंट बेसिल्स स्कूल के पास बन रही कई कालोनी जुगाड़ के सहारे बिजली उपयोग कर रहे हैं।