बस्ती। पशु तस्करों की कमर तोड़ने का पुलिस ने ताना-बाना बुन लिया है। गिरोह का भंडाफोड़ करने के लिए एसओजी की टीम लगाई गई है। सूत्र बताते हैं कि यह टीम गिरोह के काफी करीब पहुंच गई है।
बस वह पशु तस्करों को रंग हाथ पकड़ने का इंतजार कर रही है। हालांकि, पुलिस की इस चाल का तस्करों को भनक लग गई है, इसलिए करीब एक सप्ताह से पशु चोरी की घटनाओं पर विराम सा लग गया है।
सूत्र बताते हैं कि पश्चिम के तस्करों ने यहां ऐसा नेटवर्क खड़ा कर लिया है कि उन्हें चोरी के पशु एकत्र करने से लेकर पार लगाने तक में कठिनाई नहीं होती है। क्षेत्रवार सक्रिय स्थानीय सहयोगी इन तस्करों की भरपूर मदद कर रहे हैं। सर्द भरी रात में घने कोहरे के बीच किसानों के यहां से पहले पशु चुरा रहे हैं। इसके एवज में अच्छी रकम भी मिल रहा है।
बस्ती जनपद सीमा 70 किमी के दायरे में हैं। इस जिले की सीमा से गोंडा, आंबेडकर नगर, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर समेत चार जनपद जुड़े हैं। इन जनपदाें का सुदूर ग्रामीण अंचल की सड़क से कई जगह जुड़ाव है। संपर्क मार्गों की जानकारी पश्चिम के तस्करों को नहीं रहती है, इसीलिए क्षेत्रवार इनके लोकल सहयोगी सक्रिय रहते हैं। पूरे नेटवर्क में दो-तीन श्रेणी के सहयोगी शामिल हैं। क्षेत्रवार लोकल व्यक्ति ही मुख्य कैरियर की भूमिका में रहता है।
तस्कर पशुओं को पिकअप में लादकर संपर्क मार्गों के जरिये जनपद सीमा पार कराते हैं। वहीं इनके नीचे के सहयोगी दिनभर रेकी कर रात में पशुओं की चोरी करते हैं। उसे कैरियर के अड्डे तक पहुंचाते हैं। जब तक 8 से 10 पशु एकत्र हो जाते हैं तो मुख्य कैरियर तस्करी गिरोह के सरगना से सेटिंग कर उसे जिले के पार भेज दे रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि रामपुर, मुरादाबाद के तस्करों का संजाल बस्ती समेत आसपास के जनपदों तक फैला हुआ है। इसके अलावा गोंडा और आंबेडकर नगर जिले के भी तस्करों ने इस जिले में पैठ बना रखा है। दोनों ही जिले की सीमा बस्ती को छूती है। ऐसे में ये तस्कर रातोंरात यहां से चोरी किए गए पशु को आसानी से अपने जिले में पहुंचाने में कामयाब हो जाते हैं। उधर बिहार, नेपाल के भी तस्कर अपना बड़ा नेटवर्क तैयार किए हैं। जिन सहयोगीों की जिस गिरोह से सेटिंग हैं वह उनके लिए कार्य कर रहे हैं।
बंजारों पर पशु चोरी करने का शक : सूत्र बताते हैं कि तस्करों ने जिले में अपना नेटवर्क खड़ा कर रखा है। ये सहयोगी दूर-दराज बैठे तस्करों को पुलिस की गतिविधियों की पूरी जानकारी देते रहते हैं। इनकी सूचना पर ही तस्कर अपनी गतिविधियां संचालित करते हैं। बताया जा रहा है कि लोकल सहयोगी बंजारों के जरिये पशुओं की चोरी कराते हैं। यही वजह है बंजारों के डेरा भी रडार पर ले लिया है।