तेनुआ असनहरा गांव के सिवान मे जलायी गई पराली फोटो स्रोत-राजस्व प्रशासन
बस्ती। जिले में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुआं का असर अभी खत्म नहीं हो पाया है। ऊपर से खेतों में जलाई जा रही पराली से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। बुधवार को एक्यूआई 138 पर पहुंच गया।
जिले में पराली जलाने से रोकने के दावे कागजी साबित हो रहे हैं। कृषि विभाग व प्रशासन के पराली प्रबंधन के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। हर क्षेत्र में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। भानपुर तहसील क्षेत्र में पराली जलाते समय कई लोगों के गन्ने व धान की फसल जल गई।
बुधवार को सुबह लोगों को लगा कि मौसम का मिजाज बिगड़ रहा है, लेकिन धूल और धुएं से उठे प्रदूषण की वजह से फिजा बदली नजर आई। विशेषज्ञों का कहना प्रदूषण की अधिकता से ऐसा हो रहा है। प्रदूषण वायुमंडल के निचले स्तर पर है। इससे सुबह टहलने जाने में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचने के बजाय नुकसान हो सकता है।
मौसम में बदलाव के कारण शहर की हवा लगातार खराब हो रही है। एक नवंबर के बाद से एक्यूआई में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। बुधवार को एक्यूआई 138 पर पहुंच गया। इसे खराब स्तर का माना जाता है। हवा के इस स्तर से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अयोध्या के मौसम वैज्ञानिक डाॅ. अमरनाथ मिश्र ने बताया कि वातावरण में नमी के कारण एयर पाल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं।
यह ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे वायुमंडल में एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति पैदा हो रही है। दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।