बस्ती। सात महीने बीतने के बाद भी यौन शोषण पीड़िता पांच वर्षीय मासूम को आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है। वह अपनी दयनीय काया वाली मां के साथ इस कार्यालय से उस कार्यालय भटकने को मजबूर है।
बुधवार को मासूम अपनी मां के साथ जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय पहुंची। उसने अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आर्थिक सहायता के लिए फिर से फरियाद की। इसके लिए आवेदन पहले से ही दे रखा है, मगर उसे अब तक मदद नहीं मिल पाई है, जबकि जिला समाज कल्याण अधिकारी लालजी यादव ने बताया कि बजट के अभाव में मामला लटका है। बजट आते ही पीड़िता की आर्थिक मदद की जाएगी।
सदर कोतवाली क्षेत्र में सड़क के किनारे खानाबदोश जिंदगी जीने वाली यौन शोषण पीड़िता की मां ने बताया कि 12 मई की रात वह मासूम बेटी और बेटे के साथ खुले में चारपाई पर सो रही थी। रात करीब एक बजे जब उसकी नींद खुली तो देखा बेटी लापता थी। काफी खोजबीन के बाद भी बेटी नहीं मिली। सुबह करीब चार बजे वह खून से लथपथ रोते हुए पहुंची, तब तक पुलिस भी मौके पर पहुंच चुकी थी।
बेटी की हालत बेहद गंभीर थी। उस समय पति भी बीमार थे। पुलिस ने बेटी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उसने बताया कि बेटी के साथ हुई दरिंदगी की खबर सुनते ही बीमार पति सदमे में चले गए। जिससे वारदात वाले दिन ही पति की मौत हो गई। इससे उसके सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया। वह इस सोच में पड़ गई कि पति का अंतिम संस्कार करे या फिर बेटी का इलाज कराए।
बताया कि पति का अंतिम संस्कार उसके घर-परिवार वालों ने किया और वह बेटी के साथ गोरखपुर चली गई। कई दिनों के इलाज के बाद बेटी की जान तो बच गई, मगर बेटे और बेटी के ऊपर से पिता का साया उठ गया। उसने बताया कि सात महीने से दोनों बच्चों का पालन-पोषण किस तरह कर रही है, वह ही जानती है। कहा कि अब वह अपनी फरियाद लेकर डीएम के पास जाएगी।