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Basti News: भर्ती के बाद लावारिस पड़े रहते मरीज...बुलाने पर मिलती घुड़की

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इमरजेंसी वार्ड में जैसे-तैसे चल रहा प्राथमिक उपचार।
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बस्ती। जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज खुद को लावारिस समझते हैं। यह हम नहीं, बल्कि मरीजों का कहना है। उनका कहना है कि एक बार बेड पर लिटा देने के बाद कोई पूछने वाला नहीं होता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ को बुलाने पर घुड़की मिलती है। यह हाल तब है, जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जिला अस्पताल में बेहतर सुविधा देने का दावा कर रहे हैं। उधर दलालों के अस्पताल परिसर में प्रवेश को लेकर अस्पताल प्रशासन चौकन्ना दिखा।
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जिला अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में बृहस्पतिवार की दोपहर करीब 12:55 बजे हादसे में घायल हुआ एक मरीज पहुंचा। यहां डॉ. जेके राय बतौर ईएमओ मौजूद थे। मरीज खड़े-खड़े ही दर्द से कराहते हुए डॉक्टर को अपनी पीड़ा बताता रहा, तब तक एक महिला गोद में बच्चे को लेकर दाखिल हुई। बच्चे की हालात बेहद खराब थी। महिला गाेद में बच्चे को लिए करीब 10 मिनट तक खड़ी रही। इसके बाद उसका नंबर आया।
ट्रीटमेंट वार्ड में घायल मरीज की चोट पर सिर्फ रूई लगाकर चलता कर दिया गया। महिला और प्राइवेट वार्ड में बिना सुविधा शुल्क के काम होते नहीं दिखा। एक मरीज ने आरोप लाया कि पट्टी बदलने और यूरिन थैला बदलने के नाम पर रकम की मांग की जाती है।
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मरीज को गोद में उठाकर ले जाते हैं तीमारदार
तीमारदारों को जिला अस्पताल में मरीजों को खुद जांच कराने ले जाना पड़ता है। न तो उन्हें स्ट्रेचर मिल पाता है ओर न ही व्हीलचेयर। ऐसे में मरीज को तीमारदार गोद मे उठाकर जांच कराने ले जाते हैं।
जो मरीज यहां आते हैं उन्हें प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जा रहा है। डॉक्टर कंडीशन देखकर निर्णय लेते हैं लेकिन कोशिश रहती है कि मरीज यहीं पर ठीक होकर जाए। भर्ती मरीजों के लिए अलग से ऑनकाल पर डॉक्टर होते हैं। बुलाने पर तत्काल स्टाफ पहुंचे ऐसा दिशा-निर्देश है। कथित दलालों की नो-इंट्री है। इसके लिए सिक्योरिटी को अलर्ट पर रखा जाता है।
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- डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला असपताल, बस्ती।
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