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Basti News: निजी अस्पतालों में मरीज गंवा रहे जान...जांच तक सिमटी कार्रवाई

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बस्ती। मानकों को दरकिनार कर संचालित हो रहे निजी अस्पतालों का नेटवर्क काफी मजबूत है। विभाग में ऊंची पैठ का लाभ लेकर वह खूब मनमानी कर रहे हैं, मगर उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लगातार हो रही मौतों पर भी विभागीय नियंत्रण बेअसर है। इसी का लाभ उठाकर जिम्मेदार बच निकल रहे।
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उपचार के दौरान मरीज की मौत होने या मामला बिगड़ने पर हंगामा होता है, जांच की औपचारिकता निभाते हुए टीम गठित होती है। कभी-कभी कमियां बताते हुए तात्कालिक रूप से अस्पताल का एकाध हिस्सा सील भी कर दिया जाता है। मामला ठंडा पड़ते ही कार्रवाई की फाइल भी बंद हो जाती है। नतीजा कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
जिले में करीब 120 निजी अस्पताल-नर्सिंग होम और 40 के आसपास क्लीनिक का पंजीयन है। जानकार बताते हैं कि इससे इतर दाेगुने से ज्यादा अस्पताल व क्लीनिक का संचालन हो रहा है। ज्यादातर अस्पतालों में चिकित्सा सेवा को लेकर बनाए गए मानक दरकिनार हैं। यही कारण है कि अक्सर वहां इलाज में लापरवाही के कारण मरीज की मौत या हालत बिगड़ने के मामले उठते रहते हैं।
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हर बार हंगामा मचने पर टीम गठित होती है। आक्रोश शांत कराने के लिए अस्पताल के एकाध हिस्से को सील करते हुए नोटिस भी जारी किया जाता है। कुछ मामलों में पुलिस तक शामिल होती है, मगर कभी भी नौबत ठोस कार्रवाई तक नहीं आती। ऑफ द रिकार्ड इसका कारण कभी सियासी दबाव तो कभी पीड़ितों का मुकरना बताया जाता है। इससे मरीज माफिया आसानी से बच निकलते हैं। कुछ, ऐसे ही इन दिनों जनपद में हो रहा है।
अधिकांश मामले कटरा, पचपेड़िया और कैली रोड स्थित खुल मानक विहीन अस्पतालों में हो रहे हैं, मगर विभागीय टीम की अनदेखी कार्रवाई से बच जा रहे हैं। बताते हैं कि अस्पताल पर आने वाले मरीज सेटिंग के होते हैं, ऐसे में उनका बिल लगातार बढ़ाया जाता है। इसको लेकर विवाद होता है।
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