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जमीन की पैमाइश कराने के लिए 11 वर्ष से दौड़ रहे दलित किसान

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जमीन की पैमाइश कराने के लिए 11 वर्ष से दौड़ रहे दलित किसान
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जमीन पर वन विभाग ने किया है पौधरोपण, भूमिहीन हो गए किसान
जितेंद्र यादव
बस्ती/गनेेशपुर। जिले के हर्रैया तहसील क्षेत्र के डमरुआ जंगल के 22 दलित किसानों की 26 बीघा जमीन पर वन विभाग ने कब्जा जमा लिया है। इसे पाने के लिए इसकी पैमाइश कराने को यह किसान 11 वर्ष से राजस्व व वन विभाग का चक्कर काट रहे हैं। राजस्व विभाग ने जिला प्रशासन के निर्देश पर एक बार पैमाइश का प्रयास भी किया, मगर वन विभाग के जिम्मेदारों की गैर मौजूदगी के कारण संभव नहीं हो सका। इन किसानों ने शासन को भी दर्जनों पत्र भेजकर अवगत कराया है, मगर जिम्मेदार चुप्पी साधे हैं। इधर इन किसानों की जमीन पर कब्जा कर वन विभाग ने इन्हें भूमिहीन बना दिया है।
जिले के डमरुआ जंगल गांव के काश्तकारों के भूमिहीन होने का दर्द 2012 से शुरू हुआ। यहां के 204 बीघा से ज्यादा जमीन पर वन विभाग का कब्जा है। इसमें से 26 बीघा जमीन किसानों की है। इस जमीन पर कई काश्तकारों अपने आवास आदि बनाने के लिए नींव डाली थी, मगर वन विभाग ने उस पर भी रोक लगा दिया। मामला राजस्व परिषद तक गया, मगर 11 वर्ष बीत गए हैं। कोई परिणाम नहीं आया है। वन विभाग व राजस्व विभाग एक दूसरे पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ रहे हैं। पैमाइश न होने के कारण यह दलित किसान अपनी खेती बाड़ी से दूर हो गए हैं।
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इन किसानों की भूमि पर वन विभाग ने किया है कब्जा
जटाशंकर, ज्ञानदास, राम लुटावन, रामरूप, छबिलाल, नोखाई, कोदई, नीबार, सरोज कुमार, बिनोद, अमेरिका, परसराम, विश्राम, सीताराम, राम बुझारत, शंभूनाथ , शितानंद, राम कुबेर, अजीत, दिनेश, परमात्मा, दीनानाथ आदि की जमीन पर वन विभाग का कब्जा है।
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बोले डीएफओ
प्रभागीय वनाधिकारी नवीन कुमार शाक्य ने कहा कि डमरुआ जंगल का मामला संज्ञान में है। किसानों की जमीन वन विभाग के पास है। इसकी पैमाइश कराई जाएगी। इसके लिए राजस्व विभाग व वन विभाग की टीम बनाकर पैमाइश कराई जाएगी। इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा कराकर किसानों को उनकी जमीन दे दी जाएगी।
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