अधिकारी पाइप लाइन से नहीं जुड़ने का बता रहे कारण
मरीजों को नहीं मिल पा रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक चिकित्सालय कैली में मरीजों की सहूलियत के लिए लगा ऑक्सीजन प्लांट शोपीस बना हुआ है। 1.90 करोड़ रुपये के प्लांट से अब तक ऑक्सीजन ही नहीं निकली। प्लांट से पाइप लाइन कनेक्ट नहीं होने का बहाना बनाकर बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर खरीदे जा रहे हैं। इमरजेंसी में भी पाइप लाइन से आपूर्ति नहीं हो रही है।
कोरोना के समय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई थी। तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्टेट बजट से परिसर में 1.90 करोड़ रुपये खर्च करते हुए 1000 एलएमपी का ऑक्सीजन प्लांट लगवाया था। अत्याधुनिक मशीनें आईं और प्लांट को क्रियाशील कर दिया गया। मगर, वार्डों में बेड-टू-बेड पाइप लाइन कनेक्शन नहीं होने के कारण ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं दी जा सकी। बताया जाता है कि प्लांट दुरुस्त है, लेकिन जब तक वार्डों को पाइप लाइन से कनेक्ट नहीं किया जाएगा, तब तक आपूर्ति नहीं की जा सकती। इससे मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बताया जाता है कि वर्तमान में 15 से 20 सिलिंडर की रोज खपत है। एक सिलिंडर ऑक्सीजन मंगवाने पर कॉलेज प्रशासन को 220 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। यानी रोजाना तीन से चार हजार रुपये के ऑक्सीजन मंगवाने पड़ते हैं।
कैली अस्पताल में सिक इंसेंटिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) और पीडियाट्रिक इंसेंटिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) के लिए दो छोटे ऑक्सीजन प्लांट लगे हुए हैं। 500 एलएमपी के लगे ऑक्सीजन प्लांट को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय भारत सरकार, जबकि 165 एलएमपी के ऑक्सीजन प्लांट को टोरेंटो गैस कंपनी की ओर से डोनेट किया गया था। इन दोनों प्लांट से दोनों वार्ड कनेक्ट हैं, जहां पर आपूर्ति दी जाती है।
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कोट
1000 एलएमपी क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट से आपूर्ति शुरू करने के लिएनई बिल्डिंगों में ऑक्सीजन पाइप लाइन का काम होना है। सर्जिकल वार्ड, मेल वार्ड समेत अन्य वार्डों में पाइप लाइन लगवाने पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए राजकीय निर्माण निगम को कार्य मिला है। मगर, अब तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में ऑक्सीजन प्लांट से आपूर्ति शुरू नहीं हो पा रही है।
-डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज