बस्ती। बिहार से गोरखपुर की मंडी में खेसारी की आपूर्ति हर महीने हो रही हैं। धंधेबाज इसे अरहर, चना और मटर दाल में मिलाकर आसपास के जिलों में खपा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि गोरखपुर की मंडी से बस्ती में रोजाना 50 से 100 टन दाल की आपूर्ति की जा रही है।
जानकार बता रहे हैं कि पैक बोरी और पैकेट बंद दाल में भी मिलावट है। धंधेबाजों का नेटवर्क यहां थोक मंडी में फैला हुआ है। बड़े कारोबारियों के ऑर्डर पर मिलावटी दाल भी ब्रांडेड बोरियों की तर्ज पर पहुंचाई जा रही है।
एक क्विंटल दाल में 10 से 15 किलो खेसारी की मिलावट की जा रही है। यह दाल सस्ते दर पर उपलब्ध हो रही है और बाजार में 120 से 130 रुपये किलो फुटकर बेची जा रही है।
मंडी के सूत्रों केआनुसार, पांडेय बाजार के कुछ धंधेबाज गोरखपुर के नेटवर्क से जुड़े हैं। ये मध्य प्रदेश, प्रयागराज और छत्तीसगढ़ से खराब क्वालिटी की अरहर दाल मंगाते हैं। खराब दाल को पीले रंग की पॉलिश मिलाकर अच्छी क्वाॅलिटी जैसा बनाते हैं, फिर इसमें खेसारी दाल मिला दी जाती है। गोदाम में इसकी नए सिरे से पैकिंग की जाती है।
जानकार बताते हैं कि इस तरह का खेल गोरखपुर में ज्यादा है। वहां बोरी बंद मिलावटी दाल ऑर्डर पर यहां थोक मंडी में भेजा जा रहा है। कुछ स्थानीय धंधेबाज इस तरह का खेल यहां भी कर रहे हैं। उनके गोदाम में अरहर, चना, मटर दाल की इसी पैटर्न पर पैकिंग की जा रही है। इस दाल की बिक्री से उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है।
सूत्र बताते हैं कि कुछ फुटकर कारोबारियों को धंधेबाज सौ रुपये किलो तक यह दाल उपलब्ध करा रहे हैं। पॉलिश से चटख दिखने वाली मिलावटी दाल बाजार में 130 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है।
देखने में चमकदार इस दाल की डिमांड भी ज्यादा रहती है। धंधेबाज इस खेल में थोक कारोबार कर प्रति किलो 30 से 35 रुपये की कमाई आसानी से कर रहे हैं। इसकी खपत शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है।
आधा दर्जन बड़े गोदामों में हो रहा पैकिंग का धंधा : जिले में दाल के पैकिंग का कारोबार आधा दर्जन बड़े गोदामों में हो रहा है। गैर जनपद की बड़ी मंडियों से खराब क्वाॅलिटी की दाल लाकर यहां पॉलिश के साथ खेसारी की मिलावट की जाती है।
इसके बाद उसे 30 किलोग्राम की बोरियों और आधा किलो, एक किलोग्राम के पैकेट में पैक कराकर छोटे दुकानों पर आपूर्ति की जा रही है। इसका अच्छा खासा मुनाफा पूंजी वाले बड़े धंधेबाज उठा रहे हैं।