बस्ती। शहर के जिगिना स्थित केडी अस्पताल में नवजात बच्चे की मौत मामले में स्वास्थ्य महकमा ने एक्शन लेते हुए आंशिक रूप से अस्पताल की सेवा पर रोक लगा दी। वार्ड और ओपीडी पर ताला लगा दिया। अस्पताल संचालक को नोटिस जारी जवाब मांगा गया है।
छह दिन पहले सोमवार को अस्पताल में 22 दिन तक बच्चे की मौत हो गई थी। यहां बच्चे को भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। इसके एवज में पीड़ित से दो लाख रुपये ले लिए गए थे जबकि पीड़ित के पास आयुष्मान कार्ड भी था। बच्चे की मौत के बाद हंगामा मचा था।
जिस पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय टीम गठित किया। टीम जांच कर रही, लेकिन अभी तक रिपोर्ट आख्या सीएमओ के पास नहीं पहुंचा है। इससे अस्पताल पर अन्य कार्रवाई नहीं हो सकी है। शहर के जिगिना चौराहा के निकट स्थित केडी अस्पताल में मुंडेरवा थाना क्षेत्र के परसा हज्जाम के छोटू ने नवजात को भर्ती किया था। बताया था कि पत्नी की पिछले महीने निजी हॉस्पिटल में सीजर से डिलीवरी हुई। नवजात के गंदा पीने की बात बताई गई।
संबंधित अस्पताल से नवजात को इलाज के लिए जिगिना स्थित एक निजी हॉस्पिटल में भेजा गया। यहां उनके बच्चे को भर्ती किया गया। कुछ दिन इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। घर ले जाने पर फिर उसकी तबीयत बिगड़ गई। अगले दिन इसी अस्पताल में फिर से भर्ती कराया गया। परिजनों ने बताया कि संबंधित अस्पताल में 22 दिनों से बच्चे को भर्ती रखा गया था। उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर सोमवार को रेफर करने के बजाय अस्पताल संचालक ने बकाया 30 हजार भुगतान चुकता करने की शर्त रख दी। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। विभाग भी सक्रिय हुआ। हालांकि, बाद में परिजनों ने शिकायत को वापस ले लिया, लेकिन एहतियातन स्वास्थ्य विभाग जांच करा रहा है और टीम अस्पताल का रिकार्ड खंगाल रही है। वैध पंजीकरण न होने की दशा में भी कैसे अस्पताल में मरीज को भर्ती किया जा रहा था और उपचार करा रहे थे, इन सभी बिंदुओं पर जांच हो रही है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी व आईपीडी सेवा बंद करा दी गई है। जांच टीम से जल्द रिपोर्ट मांगी गई है।
रिपोर्ट आने तक अस्पताल के संचालन पर रोक है। जांच टीम के अधिकारी डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह का कहना है कि अस्पताल में मरीज भर्ती नहीं हो रहे, न ही ओपीडी चल रही है। पंजीकरण के लिए आवेदन प्राप्त हुआ है। जांच के बाद ही पंजीकरण पर कोई फैसला लिया जाएगा।