बस्ती। अरहर दाल ही नहीं, दूध और पनीर में भी मिलावट हो रही है। इससे लोगों की सेहत बिगड़ रही है। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल है। लोग रुपये खर्च करने के बाद भी शुद्ध दूध-पनीर के लिए तरस रहे हैं। सहालग में मांग बढ़ी तो पाउडर वाला दूध धंधेबाज के लिए मुफीद बन गया।
जानकार बताते हैं कि धंधेबाज मिलावटी दूध-पनीर से मांग पूरी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पनीर नहीं बिकने पर उसे कई दिनों तक फ्रीज में रखा जाता है। यह दूध-पनीर सेहत के लिए हानिकारक है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की सक्रियता के बावजूद धंधेबाज मिलावटी पनीर की बिक्री करने से नहीं चूक रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि मिलावटी पनीर बनाने के लिए पाउडर वाले दूध के साथ सोयाबीन के बीज को पीसकर मिलाया जा रहा है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों और दूध के व्यापार से जुड़े कुछ जानकारों का कहना है कि शहर और ग्रामीण इलाकों मिलाकर करीब 455.86 एमटी दूध का उत्पादन रोजाना है, जबकि खपत 912.45 एमटी है। त्योहार और अन्य विशेष अवसरों पर खपत उत्पादन का तीन गुना 1200 एमटी प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। इसमें घरों के अलावा दुकानों पर होने वाली खपत भी शामिल है। नहीं है तत्काल जांच की सुविधा : खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम मिलावटखोरी की धरपकड़ के लिए निकलती जरूर है। मगर, तत्काल जांच की सुविधा न होने से ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। पिछले दिनों शहर के एक पनीर की दुकान पर विभागीय अधिकारी पहुंचे, उन्हें दूध और पनीर में मिलावट का संदेह हुआ। नमूने की तत्काल जांच कराने के लिए दुग्ध विभाग से संपर्क किया गया। मगर, हाथ खड़े कर दिए गए।