बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग का कारोबार फिर तेजी से फल-फूल रहा है। बीडीए को गुमराह कर जमीन कारोबार से जुड़े कथित प्रापर्टी डीलर ग्राहकों को चूना लगा रहे हैं। डमरूआ और रौता क्षेत्र में मनमानी दिख रही है। नियमों को ताक पर रखकर जमीन की खरीद-फरोख्त चल रही है। जबकि कोई भी बिल्डर यहां रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। यह सब बीडीए के आंख के सामने हो रहा है।
विकास प्राधिकरण में कोई डेवलपर पंजीकृत नहीं है। इसके बाद भी जनपद में जगह-जगह भू-माफिया बिल्डर प्लाॅटिंग का कार्य धड़ल्ले से करा रहे हैं। किसी बिल्डर की ओर से अब तक ले आउट पास नहीं कराया है। इसके बाद भी धड़ल्ले से जगह-जगह प्लाॅटिंग कर जमीन की बिक्री की जा रही है।
शहर के सुव्यवस्थित विकास के लिए वर्ष 2016 में बस्ती विकास प्राधिकरण का गठन किया गया। स्थापना के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जिले का अब समुचित विकास होगा। लेकिन, जानकार बता रहे हैं कि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अवैध रूप से निर्मित होने वाले भवनों को नोटिस जारी करने और फिर उगाही कर उनका निर्माण कराने में जुटे रहे।
इतना ही नहीं जिले में कोई भी बिल्डर पंजीकृत न होने के बाद भी शहर के चारो तरफ भू-माफिया अवैध रूप से प्लाॅटिंग कराकर जमीन की खरीद और बिक्री करते रहे और अवैध काॅलोनियां बसाते रहे। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सोते रहे। वर्तमान में भी शहर के चारों तरफ अवैध प्लाॅटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। वहीं विभाग को जिले में बसी अवैध कालोनियों के संबंध में अब तक कोई जानकारी नहीं है। न ही वह अब तक कभी इस जानकारी को जुटाने का प्रयास ही किया।
परिणाम यह है कि भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं और उनके द्वारा जगह-जगह प्लाॅटिंग कराकर जमीनें बेची जा रही हैं। रौता, डमरुआ, जिगिना, सोनूपार, मूड़घाट, हवेलिया, बरगदवा, हर्दिया आदि क्षेत्र में यह कारोबार तेजी से फैला है। बताया गया कि शहर में लगातार बिना लेआउट पास कराएं अवैध रूप से प्लाॅटिंग हो रही है।
अवैध रूप से की जा रही प्लाॅटिंग में लोगों को जलनिकासी, पेयजल, सड़क और प्रकाश जैसी समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। वर्तमान में नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर उनके साथ ठगी की जा रही है। इससे आए दिन विवाद भी हो रहा है।
बीडीए में एक भी काॅलोनी का नहीं है ले-आउट मंजूर : नगर क्षेत्र में वैसे तो दर्जनों काॅलोनियां बस गई हैं। लेकिन, अगर ले आउट की बात करें तो सिर्फ नगरपालिका की ओर से बसाई गई आवास विकास काॅलोनी का ले-आउट ही स्वीकृत हुआ है। अन्य किसी भी कॉलोनी का ले-आउट पास नहीं है। वहीं, अब आवास विकास की ओर से जो काॅलोनी बसाई गई हैं। उसमें भी कई कार्य अनाधिकृत रूप से कराए गए, सड़क तक मकान बना लिए, दुकान बना दिए, नाले पर निर्माण हुआ है।