शहर से सटे गांवों में बीडीए के मानक पर नहीं हो पा रही जमीनों की प्लाटिंग
विस्तार क्षेत्र में मनमाने ढंग से निर्माण, सड़क, नाली, पानी जैसी सुविधाएं नदारद
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जमीन खरीदने में लाखों लग गए। मकान बनवाने में करोड़ रुपये खर्च हो गए। फिर भी घर पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है। मिट्टी पाटकर आना-जाना पड़ रहा है। यह हाल शहर की नई काॅलोनियाें का। दरअसल, शहरी क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो रहा है। निकटवर्ती गांवों में पुरानी आबादी से हटकर खाली जगहों पर नई काॅलोनियां विकसित हो रही हैं। मगर, यहां बीडीए के मानक का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सड़क, नाली, बिजली के खंभे, पार्किंग आदि के लिए विस्तार क्षेत्र में जगह नहीं छोड़ा जा रहा है। शहर के आसपास वाले गांवों में कंकरीट के भवन लगातार बनते जा रहे हैं। मगर, इसे मूलभूत सुविधाओं से लैस करने की कोई ठोस योजना नहीं है।
बीडीए प्रभावी हुए छह साल बीतने के बाद भी यहां अन्य महानगरों की तहर ले-आउटिंग के साथ जमीनों की प्लाटिंग की परंपरा नहीं पनप पाई है। इससे सुव्यवस्थित कॉलोनियां विकसित नहीं हो पा रही हैं। शहर में मकान बनाकर रहने की हसरत लोगों में बढ़ती जा रही है। नगर पालिका सीमा क्षेत्र के सभी हिस्से आवासीय एवं कामर्शियल निर्माण से भर गए हैं। यहां जमीनें भी महंगी हो गई है। अब नया शहरी बनने के लिए लोगों को शहर के आसपास स्थित गांवों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
समय की नजाकत को भांप रियल एस्टेट कारोबारियों ने एक दशक पहले से इन निकटवर्ती गांवों में अपना पांव पसार लिए हैं। उनके बगैर जमीन खरीदना मुमकिन नहीं हो रहा है। शहर से लगभग पांच किमी के दायरे में जमीनों की धुआंधार प्लाटिंग की जा रही है। मगर, यहां बीडीए के मानक का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जमीन ग्राहकों की डिमांड पर कारोबारियों की ओर से बमुश्किल 20 फीट चौड़ा रास्ता दिया जा रहा है। बाद में इस पर भी कब्जा कर लिया जा रहा है। इसके अलावा ड्रेनेज सिस्टम, बिजली के खंभेे, पार्किंग आदि की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में चौतरफा नई काॅलोनियां बसती जा रही हैं और जनसुविधाओं से किसी का लेना देना नहीं है।
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राजस्व अभिलेख में गांव की पहचान, मगर बन गई काॅलोनी
राजस्व अभिलेख में जिन जगहों की पहचान अभी गांव के रूप में है, वहां का स्वरूप बदल चुका है। दो दर्जन से अधिक गांव शहर के अहम हिस्से बन चुके हैं। मगर, यह नगर पालिका सीमा से बाहर है। नगर पालिका क्षेत्र में दर्ज पिकौरा शिवगुलाम वार्ड, रौतापार, कटरा वार्ड से सटे खीरीघाट, संतपुर, मिश्रौलिया, डिड़हवा, मड़वानगर, बदरगदवा, डमरूआ, हवेलिया खास, बड़ार, खोराखार, हरदिया, बसिया, डड़वा आदि गांवों का दायरा बढ़ गया है। यह सभी गांव लखनऊ- गोरखपुर हाईवे से करीब पड़ते हैं। इसलिए यहां नई आबादी बढ़ती चली गई और यह सभी गांव शहर में मिल चुके हैं।
यहां विकास के नाम ग्राम पंचायत निधि के अलावा अन्य कोई मद नहीं है। इससे इन गांवों की नई काॅलोनियों में सड़क, नाली, पानी, बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव है। लकड़ी के खंभों के सहारे जुगाड़ से घरों में बिजली पहुंचाई जा रही है। पानी की आपूर्ति जहां नहीं है वहां निजी व्यवस्था के रूप में समर सेबिल से काम चलाया जा रहा है।
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बीडीए ने मड़वानगर से खीरी घाट तक बनाई सड़क
बीडीए विस्तार क्षेत्र में अभी तक खीरी घाट ग्राम पंचायत में ही सड़क और नाली की सुविधा बहाल कर पाया है। यहां मड़वानगर से भटोलवा तक इंटरलॉकिंग सड़क एवं नाली निर्माण का कार्य कराया गया है। मगर इसके अगल- बगल बसी कालोनियों में सड़क, नाली की सुविधा अभी तक नहीं पहुंच पाई है। इसी तरह मड़वानगर, डड़वा, संतपुर आदि गांवों में भी बनाई गई कालोनियों में मूलभूत सुविधाएं नहीं है।
देखते ही देखते महंगी हो गई पचपेड़िया की जमीन
शहर का विस्तार होने के साथ जमीनों की कीमत में भी भारी उछाल आ गया। दो दशक पहले तक सन्नाटे में तब्दील रहने वाला पचपेड़िया मार्ग अब हाईवे से जुड़ने के कारण गॉधीनगर, मालवीय रोड की तरह व्यवसायिक स्थल बन गया है। यहां सड़क के दोनों तरफ कॉपलेक्स, मॉल, अस्पताल, मैरिज हॉल, शोरूम और पीछे कालोनियां विकसित हो चुकी है। वर्तमान में यह मुख्य मार्ग के सामने जमीनों की कीमत 3 से 4 हजार रुपये प्रति स्कावयर फिट हो गई है। आवागमन की दृष्टि से भी यह मार्ग अब काफी महत्वपूर्ण हो चुका है।
कैली मार्ग और डारीडीहा मार्ग पर भी बढ़ गई आबादी
जिला अस्पताल से कैली सोनूपार मार्ग और सिविल लाइन से सोनूपार मार्ग पर भी एक दर्जन से अधिक गांवों में कई कालोनियों बनकर तैयार हो चुकी है। यहां भी जमीनों की कीमत बढ़ी हुई है। राजस्व अभिलेख में गॉव के रूप में दर्ज खौरहवा, भूअर निरंजनपुर, मिश्रौलिया, मुंडेरवा, सुपेलवा, चननी, छबिलहा, कैली, जगदीशपुर, सोनूपार, कृष्णा भगौती आदि गॉवों में बाकायदे जमीनों की प्लाटिंग का कारोबार चल रहा है। यहां नई कालोनियां लगातार बस रही है। सुविधाओं के मामले में हाल एक जैसा है। घरों के सामने रास्ते के लिए छूटी जमीन पर लोग मिट्टी पाटकर आ जा रहे हैं। बारिश के दिनों में घरों तक पहुंचना मुहाल है।
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खोराखार में शुरू हुआ रास्ते पर कब्जा
हरदिया चौराहा- पटेल चौक मार्ग के किनारे खोराखारा में बसी नई कालोनी में 20 फीट चौड़ा सार्वजनिक रास्ता घरों के सामने छोड़ा गया है। मगर यहां सड़क, नाली आदि का निर्माण न होने से कालोनी में रहने वाले लोग ही इस रास्ते पर कब्जा करना शुरू कर दिए है। इसकी शिकायत भी पुलिस और बीडीए में अक्सर की जा रही है। कुछ लोगों ने पक्के निर्माण के लिए रास्ते में नींव खोद डाली है।