वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन का इंतजार
बस्ती। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली में साढ़े तीन साल से एमआरआई मशीन संचालित होने का इंतजार है। एमआरआई मशीन को साल 2018 में लग जाना था। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये से अत्याधुनिक संसाधनों वाला भवन तीन साल पहले बना दिया गया, लेकिन मशीन आज तक नहीं आई। रखरखाव के अभाव में अब भवन जर्जर होने लगा है।
जानकारी के मुताबिक, ओपेक चिकित्सालय कैली में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) में एमआरआई मशीन संचालित करने की योजना बनाई गई। इस संबंध में शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना था, जोकि नहीं लिया जा सका।
जिले में साल 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की हरी झंडी मिली। निर्माण पूरा होने के बाद साल 2019 से मेडिकल कॉलेज संचालित होने लगा। मेडिकल कॉलेज ने ओपेक चिकित्सालय कैली को ओपीडी तथा अन्य चिकित्सा सेवा के लिए संबद्ध कर लिया है। संबद्धीकरण के बाद तय हुआ कि कैली में जो उपकरण बंद हैं, उन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर संचालित किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत कैली में डायलसिस सेवा संचालित की जा रही है। इसी तरह कॉलेज प्रशासन ने पीपीपी मोड पर एमआरआई मशीन संचालित करने की योजना बनाई। इसके लिए करोड़ों रुपये का भवन साल 2018 में तैयार कर दिया गया, लेकिन मशीन स्थापित नहीं हो सकी। यही नहीं, कॉलेज प्रशासन पीपीपी मोड पर कोई संस्था भी नहीं खोज पाया है।
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एमआरआई मशीन की स्थापना का प्रस्ताव मेडिकल एजुकेशन को भेजा गया है। प्रयास है कि इस पर जल्द से जल्द काम शुरू हो जाए। चूंकि मेडिकल एजुकेशन ही भवन व मशीन स्थापना की स्वीकृति देगा। स्वीकृति के बाद इसके संचालन को संस्था का निर्धारण शासन स्तर पर होना है। ऐसे में शासन के निर्देश के साथ मशीन का भी इंतजार है।
- डॉ. मनोज कुमार, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य