चैत्र नवरात्र : सभी भक्तों की मुराद पूरी करती हैं माता मरही
गायघाट (बस्ती)। बहादुरपुर ब्लॉक क्षेत्र के कुसौरा बाजार से आठ किलोमीटर पूरब सोंधिया घाट पर स्थित मरही माता मंदिर में हर सोमवार व शुक्रवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। मान्यता है कि माता मरही अपने भक्तों की सभी मुराद पूरी करती हैं। यहां नवरात्र के दिनों में मेले जैसा माहौल रहता है। मंदिर के उत्तर दिशा में मनवर नदी के तट स्थित करीब डेढ़ हजार साल पुराना पीपल का पेड़ इसकी पौराणिकता का गवाह है।
मंदिर के महंत बाबा दुर्गा प्रसाद ओझा बताते है कि यह मंदिर उनके पूर्वजों ने बनवाया था। पहले यहां जंगल था। जिसमें दो लोगों की असमय मौत गई। एक दिन माता ने अपने भक्त बालक कोइरी को स्वप्न में बताया कि मैं मरही माता हूं और उन्होंने जंगल में उनका मंदिर बनवाने का बालक को आदेश दिया। दुर्गा प्रसाद बताते हैं कि पहले यहां माता की पिंडी स्थापित की गई। 1962 में आजमगढ़ जिले के चुन्नीलाल उपाध्याय ने जन सहयोग से यहां मंदिर का निर्माण कराया। क्षेत्र के पियारेपुर निवासी व उत्तर प्रदेश के कृषि निदेशक रहे जेपी त्रिपाठी ने 2009 में मंदिर को भव्यता प्रदान किया। इसके बाद पूर्व विधायक रवि सोनकर ने इस सिद्ध पीठ को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाया। शासन से मंदिर में सुधार के लिए धन अवमुक्त हो चुका है। बाउंड्रीवाल व तमाम कमरों को निर्माण तेजी से चल रहा है। बताते हैं कि सिद्धपीठ मरही माता मंदिर का दर्शन करने करने आसपास के तमाम जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र में यहां हजारों की संख्या में भक्त माता के दर्शन करने आते हैं।