बस्ती। नौ जनवरी को वाल्टरगंज थानाक्षेत्र के धौरहरा गांव के बंद पड़े स्कूल में जला हुआ शव मिलने की गुत्थी पुलिस अब तक नहीं सुलझा पाई। साथ ही तभी से लापता उस स्कूल के प्रबंधक जामवंत के बारे में भी अभी स्पष्ट नहीं हो पाया कि वह जिंदा है या मर गया।
कई महीने तक जामवंत के परिवार के लोग दावा करते रहे कि स्कूल के कमरे में मिला शव जामवंत का ही था मगर पुलिस ने डीएनए जांच कराया तो जामवंत के परिवार के लोगों से डीएनए मैच नहीं हुआ। इससे बड़ा एक और सवाल उसी वारदात से जुड़ा हुआ है कि जामवंत के गायब होने से पहले बगल के गांव मुनियांव का रहने वाला उसका दोस्त अंगद भी लापता है। अब संदेह यह है कि कहीं जामवंत ने ही तो अपने दोस्त का शव जलाकर खुद लापता हो गया। पुलिस की थ्योरी भी काफी हद तक इसके इर्द-गिर्द घूम रही है लेकिन अभी साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
अंगद की पत्नी रेखा देवी बताती है कि उसके लापता होने से पहले घर वालों से छिपाकर अपनी जमीन और ट्रैक्टर बेच दिया था। अंगद की पत्नी रेखा का कहना है कि उनके घर का खेवनहार सिर्फ उनके पति थे। पति अपनी मां, दो बच्चे और उसकी अच्छे से परवरिश कर रहे थे। जब लापता हुए तो शुरू में लगा कि कहीं गए होंगे, मगर अब तक वह घर नहीं लौटे। इस बीच जब यह पता चला कि जमीन का बैनामा हो चुका है तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसका कहना है कि अगर प्रशासन उनके पति के लापता होने से लेकर बैनामा होने तक के घटनाक्रम की गहनता से छानबीन करता तो सच उजागर हो जाता। मगर जामवंत कांड के बाद पुलिस एक-दो बार घर पर आई थी पर कोई निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आया।