बस्ती। राजकीय इंटर कॉलेज बस्ती परिसर में सजे भव्य पंडाल में मंडल स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम में 141 जोड़ों ने एक-दूसरे के साथ जीने की कसमे खाईं। वर-वधू ने अलग-अलग समूह में सात फेरे लिए और उपस्थित अतिथियों ने आशीर्वाद दिया। श्रम विभाग की योजना के तहत दो सौ जोड़ों की शादी कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें कम संख्या में ही वर-वधू पहुंचे।
श्रम विभाग की ओर से आयोजित सामूहिक विवाह में सुबह से आना-जाना शुरू हो गया था। वहीं, कई जोड़े समय से नहीं पहुंच पाए थे। ऐसे में उनकी शादी अलग से हुई। उपायुक्त श्रम बस्ती मंडल सचिन सिंह का कहना है कि जो लोग देर से पहुंचे, उनकी भी शादी कराई गई। विभाग की ओर से सामूहिक विवाह के पात्रों को कुल एक लाख रुपये का अनुदान दिया जाता है, जिसमें 85 हजार रुपये नकद दिए जाएंगे, जबकि 15 हजार रुपये आयोजन पर खर्च किए गए।
बताया कि कन्या विवाह अनुदान सहायता योजना के तहत बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर के जोड़े शामिल हुए। उपायुक्त श्रम ने बताया कि अनुदान में दी जानी वाली रकम की कार्रवाई पूर्ण है, जल्द ही उनके खाते में पैसा ट्रांसफर हो जाएगा। मुख्य अतिथि गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ल रहे। उन्होंने वर-वधू को आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार श्रमिकों को हर सुविधाएं मुहैया करवा रही है।
कप्तानगंज विधायक प्रतिनिधि गुलाब चंद्र सोनकर ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया। एमएलसी प्रतिनिधि हरीश सिंह, जगदीश प्रसाद शुक्ल ने संबोधित किया। उपायुक्त श्रम रचना केसरवानी ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकट किया। नोडल अधिकारी उपायुक्त उद्योग हरेंद्र प्रताप की देखरेख में आयोजन हुआ।
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कानपुर से शादी करने पहुंचा था वर
कानपुर जिले के रवि जीआईसी परिसर में पहुंचे। यहां आयोजित शादी कार्यक्रम में हिस्सा लिए। उनका कहना था कि शादी में पहुंचकर कर सात फेरे लेने का अलग ही खुशी रही। रवि नगर थाना क्षेत्र की प्रियंका से सात फेरे लिए और जन्म-जन्मांतर तक साथ हरने की कसमे लीं। इसी प्रकार बस्ती डारीडीहा के अजीत शर्मा ने ढोरिका की रानी से सात फेरे लिए। नगरा के राजेश गुप्ता ने राधिका के साथ विवाह बंधन में बंधे। सिद्धार्थनगर के विनोद कुमार व पूजा एक-दूजे के हुए। हिंदू पक्ष के वर-वधू की शादी हिंदू रीति-रिवाज और तीन जोड़ों को मुस्लिम रीति-रीवाज से शादी कराई गई।
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नाश्ता और खाने की रही व्यवस्था
वर-वधू और मेहमानों के लिए नाश्ता और खाने की व्यवस्था की गई थी। इसके अलग से पंडाल बनाया गया था। खाने में पूरा खाना और नाश्ता दिया गया। बताया गया कि प्रति वर-वधू पर 15 हजार रुपये खर्च किए गए। यह धनराशि अनुदान की रकम में तय है।