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श्रद्धा पक्ष के बाद मलमास, महीना भर आगे बढ़ जाएगी नवरात्रि

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श्रद्धा पक्ष के बाद मलमास, महीना भर आगे बढ़ जाएगी नवरात्र
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बस्ती। हर साल नवरात्र पितृपक्ष खत्म होने के अगले दिन से ही शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार अगले दिन अधिकमास (मलमास) शुरू हो रहा है। इस कारण नवरात्र करीब 20 से 25 दिन आगे खिसक जाएगी।
इस बार चातुर्मास चार महीने का न होकर पांच महीने का होगा। पंडित मंलगाचार्य शास्त्री बताते हैं कि आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन करते हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी का नाम देवशयनी है। इसका नाम पद्मा एकादशी भी है। , जो इस वर्ष एक जुलाई को पड़ रही है। भगवान का जागरण चार माह बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को होता है। इन चार मासों में सभी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित होते हैं। पर इस वर्ष इन चार मासों के बीच में मलमास आ जाने से चार माह, यानी 118 दिन की जगह पांच माह लगभग 148 दिन भगवान विश्राम करेंगे। संत-महात्माओं का चातुर्मास भी इतने ही दिन का होगा। चतुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन आदि मांगलिक मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजा-पाठ, व्रत, उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है।
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श्राद्ध पक्ष एक सितंबर से शुरू होकर 17 को खत्म होगा। 18 सितंबर से मलमास शुरू होगा, जो 16 अक्तूबर तक चलेगा। 17 अक्तूबर से नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी के साथ ही चातुर्मास समाप्त हो जाएगा। उसके बाद शुभ कार्य शुरू होंगे। पं. भर्थाचार्य पाठक बताते हैं कि चतुर्मास में नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। इनसे बचने के लिए मनीषियों ने चातुर्मास में एक ही स्थान पर गुरु यानी ईश्वर की पूजा करने को महत्व दिया गया है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सनातन धर्म में सबसे ज्यादा त्यौहार और उल्लास का समय भी यही है। चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा होती है।
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