परशुरामपुर। क्षेत्र के डुहवा पांडेय में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास भुवनेश ने भगवान विष्णु के दस अवतारों की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने वामन अवतार की कथा विस्तार से कही। बताया कि वामन भगवान ने देवताओं को स्वर्गलोक वापस दिला दिया।
कथा व्यास ने कहा कि त्रेता युग में दैत्यराज बलि ने अपनी शक्तियों से उत्पात मचा रखा था। युद्ध द्वारा देवताओं को पराजित कर बलि ने स्वर्गलोक पर कब्जा कर लिया। देवता परेशान होकर भगवान विष्णु से मदद मांगते हैं। इसी समय कश्यप ऋषि और माता अदिति से वामन भगवान जन्म लेते हैं। दैत्य राज बलि यज्ञ कर रहे होते हैं। इसी समय अपने छोटे स्वरूप में वामन भगवान वहां पहुंचते हैं। राजा बलि से तीन कदम भूमि दान में मांग लेते हैं। अपने दानी स्वभाव के लिए विख्यात बलि ने भूमि देने के लिए हां कर दी। एक कदम में वामन भगवान ने धरती लोक तो दूसरे में स्वर्गलोक नाप लिया। तीसरे के लिए जब जगह नही बची तो बलि स्वयं आगे खड़ा हो गया। दैत्यराज बलि के दानी स्वभाव से प्रसन्न होकर वामन भगवान ने उसे पाताल लोक का राजा बना दिया तथा देवताओं को स्वर्गलोक वापस दे दिया।