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Basti News: हरित पट्टी में शामिल हो गई जमीन... किसानों की बढ़ी बेचैनी

Mon, 29 Jul 2024 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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महायोजना- 2031 के प्रदर्शन के बाद चर्चाएं हुईं तेज, जमीन की उपयोगिता पर ऊहापोह
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मड़वानगर, गिदही पावर हाउस के पीछे बस गईं कॉलोनियां, मकान बनाने वालों के उड़े होश
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, टीबी अस्पताल, रोडवेज, रेलवे स्टेशन सब आसपास होनेे की वजह से गिदही पावर हाउस के पीछे, बस्ती खास, छियुलिया, लखनऊरा में लोगोें ने मकान बनवा लिए। नरहरिया, विशुनपुरवा, खौरहवा, खीरीघाट, लौकियहवा, एपीएन के पीछे, मड़वानगर, मिश्रौलिया, भूअर, अमहट, ढोरिका, बड़ार भी नई कॉलोनियों से भर गया। इन जगहोें पर इधर एक दशक में दो हजार से अधिक मकान बन चुके हैं। कुछ जगहों पर बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध करा दी गई हैं। इसी बीच करीब 20 हजार आबादी और 10 से अधिक कॉलोनियों वाले इस पूरे इलाके को हरित क्षेत्र घोषित कर दिया गया।
बीडीए की महायोजना-2031 में यह सभी क्षेत्र ग्रीन जोन में शामिल कर लिए गए हैं। नए मास्टर प्लान में इसका प्रदर्शन हुआ तो यहां के निवासियों को नींद उड़ गई। करीब दो हजार मकानों पर संकट मंडराने लगा है। यहां रहने वाले लोग सहमे हुए हैं। कहते हैं कि कहीं उनका आशियाना तोड़ न दिया जाए। बीडीए में शामिल हरित क्षेत्र को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। नौकरी या बिजनेस कर पाई-पाई जुटाकर शहरी क्षेत्र में जमीन लेकर घर बनाने की हसरत पूरी करने वाले लोग बीडीए एक्ट की जानकारी मिलते ही ऊहापोह में हैं।
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बांसी रोड स्थित बड़ेवन, ढोरिका, हवेली खास, बड़ार तथा हाईवेे से जुड़े मड़वानगर आदि जगहों पर कॉलोनियां विकसित हैं। इसमें अधिकतर सरकारी सेवा से जुड़े लोगों ने मकान बनवाए हैं। बीडीए ने महायोजना 2031 में इस इलाके के कुछ क्षेत्रों को ग्रीन जोन घोषित किया है। इस क्षेत्र में निर्माण कार्य नहीं हो सकता। जबकि गिदही पावर हाउस के पीछे, लखनऊरा, बस्ती खास में भी एक हजार से ज्यादा आलीशान मकान, दुकान, अस्पताल और स्कूल बने हुए हैं।
इस पूरे इलाके में अब खाली प्लॉट बहुत कम बचे हैं। महायोजना- 2031 लागू करने से पूर्व यहां की नवैयत पर ध्यान नहीं दिया गया। अब यहां के वाशिंदों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में कई मकान तो पुश्तैनी बताए जा रहे हैं, जो 50 से 100 साल पुराने हो गए हैं।
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सीवर लाइन और गैस पाइप लाइन भी
गिदही, बस्ती खास, लखनऊरा, बड़ेवन, ढोरिका, मड़वानगर आदि क्षेत्र शहर से बिल्कुल सटा हुआ है। यहां सीवर लाइन, गैस पाइप लाइन और पेयजल आपूर्ति जैसी सुविधाएं बहाल हो चुकी हैं। जल निगम की ओर से पाइप लाइन बिछाने के बाद हर घर को कनेक्शन दिया गया है। रसोई गैस कनेक्शन भी है। ब्लॉक एवं विधायक, सांसद निधि से सड़क और नालियों का निर्माण भी हुआ है।
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बोले लोग
पहले से बसी हुई आबादी को ग्रीन जोन में शामिल नहीं करना चाहिए था। इससे वाशिंदों को परेशानी है और हरित क्षेत्र का उद्देश्य भी नहीं पूरा होगा। लोगों ने जीवन की गाढ़ी कमाई से घर बनवाया है। उसे उजड़वाना उचित नहीं है।
सुनील कुमार, मकबूल गंज
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नदियों और सरोवरों को हरित क्षेत्र में शामिल करना जायज है। इससे जलाशयों को पाटकर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाने पर रोक लगेगा। मगर, जहां घर-मकान बन चुके हैं, अब वहां हरित क्षेत्र विकसित करने का प्रयास उचित नहीं ह।
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रजनीश कुमार, पचौरा
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कोट
महायोजना- 2031 में ग्रीन जोन के लिए जमीनों को चिह्नित कर लिया गया है। यहां निर्माण प्रतिबंधित है। जमीन किसानों की ही है। इसका उपयोग भी वहीं करेंगे। फिलहाल पुराने निर्माण पर अभी कोई व्यवधान नहीं है।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए
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