संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 15 दिसंबर को खरमास लगने के साथ ही सहालग के सीजन पर विराम लग गया। एक माह तक शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। 16 दिसंबर से 13 जनवरी तक शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। इसके साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. मोहित वैदिक ने बताया कि 15 दिसंबर की रात 10:05 बजे से खरमास शुरू हो रहा है। यह 13 जनवरी 2025 तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे। खरमास में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व है।
उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग में सूर्य के धनु और मीन राशियों में प्रवेश के दौरान आने वाला समय खरमास कहा जाता है।
पंडित देवस्य मिश्र ने बताया कि खरमास के महीने में पूजा-पाठ कीर्तन, तीर्थ यात्रा, मंत्र जाप, भागवत गीता, रामायण पाठ और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना गया है।
खरमास के दौरान दान, पुण्य, जप, और भगवान का ध्यान लगाने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है।
खरमास में सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत फलदायी और शुभ होता है। इस दौरान सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन और लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना अच्छा माना जाता है।
सहालग में तेजी से चटकने वाला बाजार खरमास की शुरुआत होते ही कमजोर पड़ने लगी है। ग्राहक भी कम आ रहे हैं। व