पुरानी बस्ती। चमकीली धातुओं की महंगाई ने सहालग का उत्साह फीका कर दिया है। पांच फरवरी से सहालग का दौर शुरू हो रहा, लेकिन सोने-चांदी की कीमत के बाद अब तांबा, पीतल व स्टील के दाम भी बढ़ गए हैं। इनसे तैयार बर्तन महंगा हो गया है।
बेटियों की शादी में इनसे तैयार बर्तन अधिक खरीदे जाते हैं, साथ ही लोग बर्तन सेट गिफ्ट भी करने के लिए खरीदते। लेकिन गिफ्ट के लिए तो दूर सहालग के घर में भी इनकी खरीद में हल्का वजन तलाश किया जा रहा।
सहालग से पहले तांबा, पीतल और एल्यूमीनियम निर्मित बर्तन भी महंगाई में शामिल हो गए हैं। महंगाई से मध्यमवर्गीय परिवार परेशान हैं। कारोबारियों के मुताबिक तांबा 450 तो पीतल 150 रुपये प्रति किलो महंगा हुआ है। बर्तन कारोबारी नवीन कसौधन ने बताया कि दो महीने पहले तक तांबा बर्तन 1150 रुपये किलो था। अब 1500 रुपये किलो के भाव बिक रहा। इसी तरह पीतल भी 150 रुपये महंगा हुआ है। एक माह पहले पीतल 800 रुपये प्रतिकिलो था जो अब 950 रुपये किलो बिक रहा।
रामेश्वर गुप्ता ने बताया कि एल्यूमीनियम के बर्तन 250 रुपये किलो से बढ़कर 300 रुपये किलो बिक रहा। बताया शादी विवाह में द्वार पूजा के वक्त रखा जाने वाला पीतल कलश 3500 रुपये में था जो अब चार हजार दो सौ से ऊपर जा पहुंचा है। बर्तन कारोबारी गणेश ने बताया कि महंगाई के कारण बाजार में इन दिनों मंदी है। लेकिन आने वाले दिनों में लगन की अधिकता से कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। बर्तन कारोबारी जयराम कुमार ने बताया कि महंगाई के कारण लोग हल्के बर्तन अधिक खरीद रहे हैं।
परंपरा का अंग बर्तन : शादी के बाद बेटी की विदाई में पारंपरिक बर्तन पीतल के दिए जाने का रिवाज है। मुकेश तिवारी, प्रमोद पांडेय ने बताया कि उनके घर फरवरी में शादी है। किसी तरह महंगे आभूषणों की खरीद हुई। अब बर्तन के रेट बढ़ने से खरीद में पीतल व तांबे के बर्तन किया हैं।