बस्ती। लहसुन की पैदावार डेढ़ से दो महीने के भीतर होने वाली है। इसके ठीक पहले एक बार फिर इसके दामों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। सोमवार को खुदरा बाजार में लहसुन 500 से 550 रुपये प्रति किलो तक बिका है। एक सप्ताह में 100 से 150 रुपये प्रति किलो बढ़ा है। सहालग की वजह से इसकी कीमत में उछाल आया है।
शादी-विवाह में स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करने के लिए कैटर्स के सामग्री चार्ट में लहसुन का उल्लेख अनिवार्य रूप से हैं। आयोजक मजबूरी में उनकी डिमांड पूरी कर रहे हैं। इस वजह से लहसुन की खपत बढ़ गई है। अनुमान था कि पैदावार का समय नजदीक हैं, इसलिए लहसुन के भाव गिर सकते हैं। अभी 15 दिन पहले तक 350 से 400 रुपये किलो बिकने वाला लहसुन अचानक 500 से 550 रुपये किलो तक पहुंच गया। आम लोगों की पहुंच से अब लहसुन दूर हो चुका है।
कभी झोले में किलो भर लहसुन ले जाने वाले लोग 100 ग्राम लहसुन खरीदने में भी अपना बजट निहार रहे हैं। लोग लहसुन के सेवन से परहेज करना ही मुनासिब समझ रहे हैं। इसकी जगह अदरक, हरी धनिया, मूली खरीद रहे हैं। दाल तड़का और सब्जियों में छौका एवं श्रमिकों की चटनी में शुमार होने वाला लहसुन अब दूर की कौड़ी जैसा हो गया है। केवल मैरिज पार्टी में ही किलो दो किलो लहसुन पहुंच रहा है।
थोक कारोबारियों के मुताबिक राजस्थान और मध्य प्रदेश में लहसुन की फसल अच्छी न होने से आवक कम हुई है। इसके कारण दाम बढ़ रहे हैं। एक माह पहले थोक में लहसुन 150 से 250 रुपये किलो था। सोमवार को थोक भाव 300 से 350 रुपये पहुंच गया। फुटकर में इसकी कीमत 500 से 550 रुपये तक पहुंच चुकी है। किराना व्यवसायी शालू गुप्ता का कहना है कि पिछले साल नवंबर माह में 250 से 300 रुपये किलो फुटकर में लहसुन बेचा गया था। अब बढ़ते भाव की चर्चा होने लगी है। कारोबारी अमित के मुताबिक हाईवे स्थित बड़ी मंडी में रोज चार से पांच छोटी गाड़ी लहसुन की आवक थी। इस समय घटकर एक से दो गाड़ी तक सिमट गई है।