अमहट घाट रोड पर विसर्जन को लेकर रहा उल्लास संवाद
बस्ती। शहर के अमहट घाट पर मूर्ति विसर्जन का सिलसिला अगले दिन मंगलवार को दिन में दो बजे तक चला। प्रशासन को अनुमान नहीं था कि विसर्जन में इतना वक्त लगेगा। सोमवार की शाम से विसर्जन ड्यूटी में तैनात कुछ अधिकारियों, कर्मचारियों को अगले दिन कमान दूसरे के हाथों में सौंप लौटना पड़ा। मंगलवार को 295 मूर्तियां विसर्जित कराई गई।
शहरी क्षेत्र की प्रतिमाओं का विसर्जन अमहट घाट पर किया जाता है। इस बार छह सौ दुर्गा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन होना था। प्रशासन को अनुमान था कि सोमवार की रात से लेकर मंगलवार की सुबह तक विसर्जन निपट जाएगा। मगर रात में प्रतिमाओं का कारवां इतना बढ़ गया कि विसर्जन में काफी वक्त लग गया है। ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों का कहना था कि एक पंडाल से पांच-छह मूर्तियां विसर्जन के लिए लाई गई थी।
मूर्तियों को क्रेन से बहुत संभालकर उतारकर विसर्जित करने में वक्त लग रहा था। अनुमानित 1800 मूर्तियां विसर्जित की गई है। अमहट से लेकर कचहरी चौराहे तक मंगलवार को दिन में 12 बजे तक कतार में मूर्तियों से लदे वाहन खड़े रहे। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी अपनी देखरेख में मूर्तियों का विसर्जन करा रहे थे। आयोजन समिति के लोग भी विसर्जन में वक्त लगने से थकान महसूस कर रहे थे। विसर्जन के बाद लोग वाहनों पर सवार होकर घर के लिए निकले। प्रशासनिक अफसर और पुलिस के जवान भी प्रतिमा विसर्जन में विलंब होने के कारण हलकान रहे।