मंडी में बिक्री के लिए रखा आलू। संवाद
पुरानी बस्ती। होली की दस्तक होते ही घर-घर गुझिया बनने लगी है। मेहमान नवाजी व पूरे वर्ष जुबान को नमकीन का स्वाद देने वाले पापड़, चिप्स व कचरी भी बनने लगी है। तरह-तरह के आकृति वाले यह नमकीन चावल, साबुदाना व आलू से बन रहे। होली मिलन के लिए आने वालों के लिए हो रहा यह इंतजाम बारिश के सीजन में चाय की प्याली का लुत्फ बढ़ाता है।
पुरानी बस्ती मंडी में इन दिनों आलू की बिक्री खूब हो रही है। न सिर्फ बिक्री में उछाल है, बल्कि रेट भी लुढ़का है। मंडी में थोक आलू कारोबार से जुड़े प्रहलाद पाल ने बताया कि 20 दिन पहले तक आलू 500 रुपये बोरी था जो अब 375 पर आ गया है। रेट कम होने के कारण बिक्री में तेजी आई है।
घर-घर सब्जी के लिए कम, बल्कि चिप्स-पापड़ के लिए आलू की खरीद अधिक हो रही। महातम चौधरी ने बताया कि 20 दिन पहले 50 से 75 बोरी आलू प्रतिदिन बिकता था। अब यह 100 के पार पहुंच गया है। पहले बाहरी जनपदों से आलू पहुंच रहा था, लेकिन स्थानीय आलू तैयार होने के बाद यह 10 रुपये किलो की जगह सात रुपये किलो बिक रहा।
गुझिया के साथ पापड़ बदलता है जुबान का जायका : दक्षिण दरवाजा रहने वाली ज्योति पटवा, निहारिका श्रीवास्तव, कन्यावती पांडेय, सरिता ने बताया कि हर साल होली से सप्ताह भर पहले आलू के पापड़ व चिप्स तैयार करते हैं। इससे होली मिलने आए मेहमानों के लिए गुझिया के साथ नमकीन का इंतजाम भी हो जाता है। इस बार भी लगभग सभी घरों में इसे तैयार करने में महिलाएं व बच्चे जुटे हैं। आलू चिप्स व पापड़ नवरात्रि में भी काम आते हैं। इसलिए पर्याप्त मात्रा में बनाया जाता है। इन दिनों लोकल आलू भी बाजार में आ गए हैं।