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डाटा इंट्री आपरेटर की नियुक्ति में हेराफेरी की पुष्टि, नोटिस

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डाटा इंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति में हेराफेरी की पुष्टि, नोटिस
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बस्ती/कुदरहा। कुदरहा ब्लॉक के परेवा गांव में पंचायत सहायक/ डाटा एंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति अंकों में हेराफेरी कर कूट रचना के आधार पर की गई है। इसकी पुष्टि सहायक विकास अधिकारी गिरीश सिंह राठौर व जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन राजा शेर सिंह की जांच के बाद हो गई है। इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी शिवशंकर सिंह ने ग्राम प्रधान ममता, ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रभारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत आनंद कुमार एवं सत्यापन करने वाले अधिकारी को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण तलब किया है।
कुदरहा ब्लॉक इन दिनों अपने कारनामों से सुर्खियों में है। इस बार परेवा गांव में पंचायत सहायक/ डाटा इंट्री ऑपरेटर की नियुक्ति में हेराफेरी की शिकायत के बाद हुई जांच में तमाम खामियां पाई गई हैं। इस नियुक्ति में महिला अभ्यर्थी को लाभ पहुंचाने के लिए उसकी जन्मतिथि को बदल कर जहां पात्र बना दिया गया वहीं हाईस्कूल के अंक पत्र में दस अंक बढ़ाकर कूटरचित मार्कशीट भी बनाई गई थी। इसकी शिकायत गांव के ही दीनानाथ चौधरी ने डीएम से की थी, जिस आधार पर तत्कालीन डीएम ने जांच के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को नामित किया था। जिला पंचायत राज अधिकारी ने अपने विभाग के सहायक विकास अधिकारी गिरीश सिंह राठौर व जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन राजा शेर सिंह को मौके पर जांच करने का निर्देश दिया। जिसकी जांच के बाद दोनों अधिकारियों ने जांच आख्या डीपीआरओ को सौंप दी।
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जांच अधिकारी राजा शेर सिंह ने बताया कि जांच में पाया गया कि आवेदिका के मार्कशीट में जन्मतिथि पहली जनवरी 2004 अंकित था, लेकिन जब तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी आनंद कुमार सिंह ने मेरिट सूची तैयार की तो उसमें जन्मतिथि पहली जनवरी 2003 अंकित कर दिया। इस तरह नाबालिग आवेदिका को बालिग बना दिया। यही नहीं, हाईस्कूल की मार्कशीट में प्राप्तांक 467 अंक के जगह 477 अंक दिखाकर 24 लोगों की सूची में सपना को सबसे अधिक मेरिट में चयनित कर दिया। और तो और जब तुलनात्मक चार्ट सत्यापन के लिए तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचा। तो उन्होंने भी आंख मूंदकर सत्यापित भी कर दिया। यही नहीं, खबर तो यह भी है कि शिकायत के बावजूद संबंधित की नियुक्ति कर एक माह का मानदेय भी जारी कर दिया गया। जिला पंचायत राज अधिकारी ने अपनी जांच आख्या में ग्राम प्रधान ममता, ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रभारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत आनंद कुमार एवं सत्यापन करने वाले बीईओ दोषी पाए गए हैं।
डीपीआरओ शिवशंकर सिंह ने कहा कि दोषियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दी गई है। तीन दिन में उनका जवाब तलब किया गया है।
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