तबादले से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित, निजी अस्पतालों की शरण में मरीज
बस्ती। जिला चिकित्सालय में नौ चिकित्सकों के स्थानांतरण से व्यवस्था पटरी से उतर गई है। इसके चलते गरीब मरीजों को भी निजी चिकित्सालय की शरण में जाना पड़ रहा है। वहां उन्हें पांच से छह सौ रुपये फीस देकर इलाज कराना पड़ रहा है। इसके अलावा दवा पर भी धन व्यय हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि शासन ने अस्पताल के एकमात्र फिजीशियन के अलावा दो में से एक सर्जन, चार में से तीन हड्डी रोग सर्जन, चार में से दो बाल रोग विशेषज्ञ व एक अन्य चिकित्सक को स्थानांतरित कर दिया। इस स्थानांतरण के चलते फिजीशियन की ओर से संचालित विभाग पर ताला लटक गया है। जबकि सर्जरी में मात्र एक चिकित्सक होने के कारण सर्जरी व ट्रॉमा सेंटर दोनों प्रभावित है। यही हाल हड्डी रोग में भी है। सर्जन के स्थानांतरण के चलते आपरेशन करीब-करीब बंद हो गया है।
कप्तानगंज निवासी रमाशंकर पांडेय को पेट में दिक्कत थी। जिला अस्पताल में फिजीशियन को दिखाने पहुंचे थे। लेकिन, यहां पर्ची काटते समय बताया गया कि डॉ. रामजी सोनी का स्थानांतरण हो चुका है। ऐसे में वह किसी अन्य से सलाह ले सकता है। पांडेय ने कहा कि चिकित्सक न मिलने के कारण वे निजी चिकित्सक को छह सौ रुपये फीस देकर दिखाए।
पुरानी बस्ती निवासी अजीम की पत्नी को अपेंडिस है। दर्द होने पर चिकित्सक को दिखाने पहुंचे तो पता चला कि ओपीडी में चिकित्सक हैं ही नहीं। ऐसे में मजबूरन शहर के निजी चिकित्सालय में सर्जन को दिखाना पड़ा। पांच सौ रुपये फीस के साथ दवा भी ली है।
पांडेय बाजार निवासी अखिलेश कुमार ने कहा कि माता जी को को चोट लग गई है। हड्डी के सर्जन को दिखने गए थे, मगर पता चला कि तीन चिकित्सक स्थानांतरित हो चुके हैं। यहां पर चिकित्सक न मिलने के कारण तत्काल निजी चिकित्सालय में हड्डी रोग विशेषज्ञ से सलाह लिए हैं। चिकित्सालय की दशा बेहद खराब है।
गनेशपुर निवासी राज बहादुर ने बताया कि वे अपने रिश्तेदार के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। लेकिन, यहां की व्यवस्था बेहद दयनीय है। फिजीशियन नहीं, हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं, अल्ट्रासाउंड बंद है। इन स्थितियों के चलते राज बहादुर ने अपने मरीज को निजी चिकित्सालय में दिखाया है।
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बोले, जिला चिकित्सालय के प्रमुख अधीक्षक
सिनियर सुपरिटेंडेंट इंचार्ज (एसआईसी) डॉ. आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि स्थानांतरण के चलते मरीजों को दिक्कत आ रही है। फिजीशियन के स्थानांतरण से मेडिसिन विभाग बंद है। यही हाल सर्जरी का भी है। एक ही चिकित्सक है उनसे ओपीडी कराई जाए अथवा आपरेशन। ऐसे में भी जो सुविधा है उसका शत प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है। चिकित्सकों की डिमांड भेजी गई है।