फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज संचालकों को फर्जी प्रमाणपत्र मुहैया कराता था पीयूष
गिरफ्तारी की भनक लगने के बाद भागता फिर रहा था गिरोह से जुड़ा जालसाज
आईजी के निर्देश पर एसआईटी कर रही है पैरा मेडिकल घोटाले की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। फर्जी पैरा मेडिकल कॉलेज घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने गाजियाबाद (गौतम बुद्धनगर) के फर्जी शिक्षक पीयूष पांडेय को बलिया से गिरफ्तार कर लिया। बांके बिहारी पुरम बिसरख रोड़ छपरौला थाना बिसरख जनपद गौतमबुद्धनगर का रहने वाला पीयूष घोटाले के मास्टरमाइंड केके चौधरी का खास सहयोगी बताया जा रहा है। यह प्रकरण सामने आने के बाद वह घर से फरार था। टीम ने बलिया के बक्सर बाॅर्डर गंगा नदी पुल थाना नरही से बुधवार शाम पांच बजे गिरफ्तार किया। इस प्रकरण में अब तक 11 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
हालांकि, पूछताछ में एसआईटी पीयूष से कोई राज नहीं उगलवा सकी। वह खुद को पाक-साफ बता रहा है। जबकि उसके पहले गिरफ्तार किए गए मास्टरमाइंड केके चौधरी ने उसे ही फर्जी मार्कशीट मुहैया कराने का सूत्राधार बताया था। एसआईटी के मुख्य विवेचक इंस्पेक्टर संजय कुमार ने बताया कि पकड़ा गया पीयूष गिरोह से जुड़े बाकी काॅलेज संचालकों से रुपये लेकर ओडिश, एटा नगर अरुणांचल प्रदेश के पैरा मेडिकल यूनिवर्सिटी का रोल नंबर, मार्कशीट और अन्य प्रमाणपत्र मुहैया कराता था। वह जो मार्कशीट उपलब्ध कराता था, उस रोल नंबर का असली विद्यार्थी भी होता था। मगर, उसका कॉलेज और नाम अलग होता था।
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मास्टरमाइंड से पूछताछ में सामने आया था पीयूष का नाम
एसआईटी ने पिछले दिन जब प्रकरण के मास्टरमाइंड केके चौधरी को गिरफ्तार किया था तो उसने मार्कशीट मुहैया कराने वाले पीयूष पांडेय का नाम उगला था। पुलिस के मुताबिक, बैंक खातों का ब्योरा खंगालने पर पीयूष के बैंक खाते में केके चौधरी के खाते से रुपये भेजने की पुष्टि हुई थी। तभी से पुलिस पीयूष की तलाश में जुट गई थी। मगर, इसकी भनक लगने के बाद वह फरार हो गया था। तब से उसने कई जगह ठिकाना बदला, लेकिन पीछा करते हुए पुलिस उसे बलिया से धर दबोचा।
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एसआईटी के गठन के बाद आई तेजी
फर्जी पैरा मेडिकल काॅलेज संचालकों पर कोतवाली और कप्तानगंज थाने में अलग-अलग चार केस दर्ज हैं। अलग-अलग विद्यार्थियों की तहरीर पर जाली दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी, अमानत में खयानत, धमकी आदि के आरोप लगाए गए हैं। बाद में पुलिस ने आपराधिक साजिश की धारा को भी जोड़ दिया। सभी केस के अलग-अलग होने से पुलिस तफ्तीश करने में उलझ गई थी। इस बीच 14 सितंबर को बी-फार्मा, डी-फार्मा के विद्यार्थियों व अभिभावकों ने आईजी से मिलकर अपनी समस्याओं को रखा था। इसे गंभीरता से लेते हुए आईजी ने एसआईटी के गठन का आदेश जारी किया। एसआईटी टीम को अलग-अलग थानों में दर्ज चारों केस की तफ्तीश कर जल्द से जल्द निस्तारण के निर्देश दिए थे। क्राइम ब्रांच के निरीक्षक संजय कुमार को विवेचक और सीओ आलोक प्रसाद को पर्यवेक्षण अधिकारी नियुक्त किया गया है। एसआईटी के गठन के बाद केस में काफी तेजी आई। पिछले हफ्ते कप्तानगंज में दो फर्जी कालेज चलाने वाले मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और उसके ठिकानों से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए। तभी से इस प्रकरण में नए-नए खुलासे हो रहे हैं।