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गैर प्रांत अथवा जिले में फंसे अपनों की सता रही चिंता

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गैर प्रांत अथवा जिले में फंसे अपनों की सता रही चिंता
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बड़ी संख्या में पंजाब, मुंबई, गुजरात, दिल्ली में फंसे हैं जिले के कई लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लॉकडाउन में परदेस में फंसे ‘अपनों’ की चिंता अब परिवार वालों को अधिक सताने लगी है। किसी भी तरह घर वापसी की व्यवस्था की जुगत में लगे हैं। इस कठिन दौर में एक मात्र उम्मीद की किरण जिला प्रशासन खुद भ्रमित है। जिले स्तर से कभी उनके लिए पास जारी करने का निर्देश दिया जाता है तो कभी उसका खंडन। इसे लेकर लोग परेशान हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट रुख अख्तियार करना चाहिए।
लॉकडाउन में दिल्ली, मुंबई, जयपुर, लुधियाना, सूरत, अहमदाबाद, पंजाब आदि महानगरों से कोई पैदल तो कोई ट्रक, ट्राला या अन्य साधन से वापस आ गए। बाद में बार्डर सील होने पर आवागमन में बाधा होने गई। कहा गया कि जो जहां है, वहीं रहे, लेकिन लॉकडाउन का दायरा बढ़ते जाने से अब शासन-प्रशासन भी चाहता है कि बाहर फंसे लोग घर लाए जाएं। पहले ई-पास बनाने के लिंक दिए गए। फिर रविवार, सोमवार को जिले स्तर से पत्र जारी करने के लिए एक मजिस्ट्रेट को नामित किया गया। बाकायदा कहा गया कि जिसके परिवार के लोग जिले से बाहर फंसे हों या प्रदेश के बाहर, वह दिए गए नंबर पर कॉल करके नोट कराएं। ताकि उसके लाने का पास जारी किया जाए। यह खबर लोगों को पता चली तो मंगलवार को रजिस्ट्रेशन कराने वालों का तांता लग गया, जिसे देख प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। बात यहां तक पहुंच गई कि पास न जारी करने का खंडन करना पड़ा। यादव पुरवा के राम दौन यादव, सुनील सिंह अरबापुर, राघवेंद्र प्रताप मुंडेरवा, अंजनी लाल श्रीवास्तव गांधीनगर, हरि प्रकाश मौर्य आदि कहते हैं कि प्रशासन को इसके लिए ठोस कार्ययोजना बनानी चाहिए। ऐसा संभव न हो तो परिवार वालों को सांत्वना और आश्वासन दिया जाना चाहिए, न कि भ्रामक निर्देश।
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समाधान का दावा
जॉइंट्स मजिस्ट्रेट प्रेम प्रकाश मीणा के अनुसार बाहर फंसे जिले के लोगों को लाने के लिए लिंक उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें कोई फोन नहीं करना है। ऑनलाइन सिर्फ जानकारी उपलब्ध करानी है। इसके बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।
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