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Basti News: बोतलबंद पानी में भी धोखा...ब्रांडेड के नाम पर नल का जल

Sat, 22 Mar 2025 12:58 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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पुरानी बस्ती क्षेत्र के गोदाम में भरा बोतलबंद पानी
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ब्रांडेड कंपनी के बोतल में लोकल पानी भरकर बेच रहे धंधेबाज
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पुरानी बस्ती में बृहस्पतिवार को पकड़ा गया था ऐसे बोतलबंद पानी का जखीरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बोतल बंद पानी जिसे आप शुद्ध समझकर पी रहे हैं, उसमें भी धोखा है। धंधेबाजों ने फर्जी तरीके से नल का पानी ब्रांडेड कंपनी के बोतल में भरकर बाजार में झोंक दिया है। कई दुकानदार तक नहीं पहचान पाते कि उनसे बिकवाए जा पानी में धोखा है। ज्यादा मुनाफा के लालच में दुकानदार खुशी-खुशी पानी की बोतल दुकान पर उतरवा ले रहा है। ग्राहक भी बाहरी रंग-बनावट देखकर उसे शुद्ध मानकर प्यास बुझा ले रहा है। चूंकि इसे चलते-फिरते इस्तेमाल करने वालों की तादाद ज्यादा है, इसलिए स्वाद अलग मिलने पर भी ग्राहक आपत्ति नहीं कर पाता।
जानकार बताते हैं कि ऐसा पानी पीने से कई तरह के खतरे हैं। रसायन विज्ञान के प्रवक्ता शैलेश पटवा बताते हैं कि अगर पानी शुद्ध कर नहीं भरा गया है तो उसका इस्तेमाल कई बीमारियां पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि बृहस्पतिवार को पानी का ऐसा जखीरा बरामद किया गया था, जिसमें यही किया गया था। वैदिक ब्रांड की बोतल में नल का पानी भरकर बेचा जा रहा था।
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यह प्रकरण सामने आने के बाद लोगों में संदेह व्यक्त किया जाने लगा है कि यदि ऐसा है फिर तो किसी भी बोतल बंद पानी पर भरोसा करना ठीक नहीं है। शादी समारोह हो या सफर, सभी जगह बोतल बंद पानी पीने-पिलाने का ट्रेड चल रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की बोतल खरीदकर पीना कई बार मजबूरी बन जाती है।
आम धारणा है कि बोतल में बिक रहा पानी साफ-स्वच्छ और शुद्ध होगा, मगर यहां तो नया खेल सामने आ रहा है। पता चला है कि ब्रांडेड कंपनी जैसी दिखने वाली बोतल में कहीं से पानी भरकर बेचा जा रहा है। जांच करने गई खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को संदेह है कि उन बोतलों में साधारण नल का पानी भरा गया है। इसके नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।
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यह है पूरा खेल
बोतल बंद पानी की चलन काफी बढ़ गया। एक जानकार ने बताया कि यहां करीब तीन सौ कंपनियों की दखल है। हर सीजन में पचास से ज्यादा नई कंपनियां बाजार में आती हैं और इतनी ही हर सीजन में लापता हो जाती हैं। पैकिंग के लिए किसी न किसी प्लांट में उसे पानी भरा जाता है। नकली स्टिकर लगाकर रिटेलरों, चाय की दुकानों, होटलों या किसी समारोह में खपा दिया जाता है। नल से तो शुद्ध ही हो गया, यह मानकर लोग पानी पीकर भूल जाते हैं।
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500 पीपीएम तक होनी चाहिए टीडीएस
राजकीय इंटर कॉलेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता शैलेश पटवा बताते हैं कि शुद्ध पानी में टीडीएस की मात्रा 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) होनी चाहिए। इसका पीएच लेवल 7.0 से 8.5 के बीच होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर नुकसानदेह है। निजी आरओ से आपूर्ति किए जाने वाले पानी में टीडीएस और पीएच की नियमित जांच होनी चाहिए। पानी में अशुद्धता से लोग त्वचा रोग, पथरी, हेपेटाइटिस या पीलिया, हैजा, पोलियो, टायफाइड, डायरिया आदि के शिकार हो सकते हैं।
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सर्वे में आ चुके हैं भयावह आंकडे़
जिले में लगे सरकारी हैंडपंपों की वर्ष 2011 में कराए गए सर्वे हकीकत बताने के लिए काफी है। सेंट्रल से आई टीम ने 10 ब्लाॅकों के करीब पांच दर्जन से अधिक गांवों में पानी की जांच की थी। रिपोर्ट में सदर, बनकटी, गौर, सांऊघाट ब्लॉक के नौ गांवों के हैंडपंपों में फ्लोराइड मानक से अधिक पाए गए थे। जबकि हर्रैया, परशुरामपुर, सल्टौआ, सांऊघाट, रामनगर, बहादुरपुर, रुधौली, विक्रमजोत के गांवों में आयरन अधिक मिला था। हर्रैया के मझरिया गांव के दो पुरवे और सांऊघाट के कनैली के तीन पुरवों में पानी में कई जरूरी तत्वों में अधिकता पाई गई थी।

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पेयजल के मानक और अस्वीकार्यता की सीमा



गुण स्वीकार्य अस्वीकार्य
टर्बिडिटी (गंदापन) 1 10
पीएच 7.0 से 8.5 9.2

टीडीएस(मिग्रा/लीटर) 500 2000
हार्डनेस(मिग्रा/लीटर) 200 600
क्लोराइड(मिग्रा/लीटर) 1.00 1.5
नाइट्रेट(मिग्रा/लीटर) 45 45
क्लोरिन(मिग्रा/लीटर) 0.2 1.0
क्षारीय(मिग्रा/लीटर) 200 600
आर्सेनिक(मिग्रा/लीटर) 0.01 0.05
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पानी की गुणवत्ता की ऐसे करें जांच

वाटर सेफ स्टरलाइज्ड विषाणुगत जांच किट का प्रयोग कर आसानी से पानी की गुणवत्ता जांची जा सकती है। जांच से पहले अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धो लें। जांच किट की शीशी का ढक्कन खोलें और उसमें लगे निशान तक पानी को सीधे भर दें। ढक्कन लगाकर किसी भी गरम स्थान पर (30 से 37 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर) 24 से 48 घंटे तक रख दें। अब पानी के रंग में आए बदलाव को देखें।

- अगर पानी का रंग काला या शीशी में काले रंग की तलछट जमा हो जाए तो पानी में हानिकारक सूक्ष्म जीवाणु हो सकते हैं। इस पानी को क्लोरिन या फिर उबाल कर इस्तेमाल करना चाहिए।
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- अगर 24 से 48 घंटे के बाद भी पानी के रंग में कोई बदलाव नहीं आता है तो पानी पीने के लिए उपयुक्त है।
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कोट

पकड़े गए बोतल बंद पानी का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि इसमें किस तरह का पानी भरा गया है। हाल-फिलहाल बोतल बंद पानी का कोई नमूना जांच के लिए नहीं भेजा गया है।
- धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी
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