धड़ल्ले से बिक रही प्रतिबंधित मछली थाई मांगुर
नेपाल और बांग्लादेश में होता है अधिक पालन, तस्करी कर लाई जा रहीं मछलियां
राज प्रकाश
बस्ती। मछली खाने के शौकीन जरा संभल जाएं। आजकल जिले में धड़ल्ले से प्रतिबंधित मछली थाई मांगुर बिक रही है। इनके खाने से आपकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह पर्यावरण के लिए भी खतरनाक हैं। सूत्रों की मानें तो ये मछलियां नेपाल से तस्करी कर जिले में बेंची जा रही हैं, जिन्हें लोग सस्ते दामों पर खरीद हैं।
थाई मांगुर को फेरी के माध्यम से भी बेचा जा रहा है। सोमवार को नगर के गांधीनगर, रामेश्वरपुरी वार्ड समेत कई वार्डों में फेरी वाले इन मछलियों को बेचते दिखे। जिन लोगों को इन मछलियों के बारे में नहीं पता हैं, वे तो कम दाम के चलते इन्हें खरीद कर खा रहे हैं। प्रतिबंधित होने के कारण न तो देशभर में इसका पालन हो सकता है और न ही बिक्री। हैरत की बात यह है कि जिम्मेदारों की नजर भी इस ओर नहीं पड़ रही है।
किसी भी पानी में तेजी से बढ़ती है यह मछली
थाईलैंड में विकसित थाई मांगुर मांसाहारी मछली की विशेषता यह है कि यह किसी भी पानी (दूषित पानी) में तेजी से बढ़ती है। जहां अन्य मछलियां पानी में ऑक्सीजन की कमी से मर जाती हैं, वहीं यह आसानी से जीवित रहती है। थाई मांगुर छोटी मछलियों समेत यह कई अन्य जलीय कीड़े-मकोड़ों को खा जाती है। इससे तालाब का पर्यावरण भी असंतुलित हो जाता है।
वर्ष 2000 में देशभर में लगा था प्रतिबंध
प्रभारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य संदीप कुमार वर्मा के अनुसार, थाई मांगुर मछली को वर्ष 1998 में सबसे पहले केरल में प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने वर्ष 2000 में देश भर में इसकी बिक्री पर प्रतिबंधित लगा दिया। यह मछली मांसाहारी होने के कारण मनुष्य का मांस भी खाकर बढ़ जाती है। ऐसे में इनका सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसी कारण इस पर रोक लगाई गई थी। पड़ोसी देश नेपाल व बांग्लादेश में इनका पालन अधिक किया जाता है। वहीं से इन मछलियां को अन्य जगहों पर भेजा जाता है। जनपद में इसकी बिक्री का मामला अब तक संज्ञान में नहीं था। उच्चाधिकारियों से अवगत कराकर कार्रवाई की जाएगी।