बस्ती। पंचायत चुनाव का मतगणना कार्य शांति पूर्वक संपन्न हुआ। इस बार
मतगणना तेजी से हुई। काउंटिंग शुरू होने के एक घंटे में ही पहला परिणाम आ
गया। जबकि वर्ष 2010 की मतगणना में पहला परिणाम आने में लगभग 10 घंटे लग गए
थे। पूरा परिणाम आने में 26 घंटे से अधिक लगे थे।
यह पहली बार हुआ
कि किसी भी ब्लॉक में री काउंटिग कराने की मांग नहीं की। मतगणना का परिणाम
जानने के लिए प्रधान प्रत्याशी और उनके समर्थक सुबह से गणना स्थल पर जुटने
लगे थे। कुछ ने तो गणना स्थल पर ही रात बिताई। परिणाम जानने के लिए लोगों
में खूब उत्साह देखा गया। परिणाम शीघ्र आने से सभी ने राहत की सांस ली।
गणना
सुबह सात बजे शुरू हुई। परिणाम को लेकर न सिर्फ प्रत्याशी और उनके समर्थक
बेचैन थे बल्कि प्रेक्षक भी उत्सुक थे। आयोग की ओर से हर घंटे की रिपोर्ट
मांगी जा रही थी।
सरकारी तौर पर परिणाम एकत्रित करने की व्यवस्था
तीन स्तर पर बनाई गई थी। पहला कंट्रोल रूम, दूसरा विकास भवन और तीसरा
प्रेक्षक निवास। जिले का पहला परिणाम सुबह आठ बजे सदर ब्लॉक के ग्राम नगरा
का आया।
यहां से तुफैल विजयी घोषित हुए। दोपहर तीन बजे तक 84 फीसदी
से अधिक परिणाम आ चुके थे। 1233 पद के सापेक्ष 1040 के परिणाम घोषित हो
चुके थे। रुधौली, सदर, कप्तानगंज, विक्रमजोत, हर्रैया, परशुरामपुर, रामनगर,
साऊंघाट और दुबौलिया ब्लॉकों के सभी पदाें के परिणाम तीन बजे तक आ चुके
थे।
पिछली बार से दोगुने टेबल लगे थे
इस बार मतगणना के लिए जो
स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की गई थी कि उसका परिणाम रहा कि एक घंटे के अंदर
पहला परिणाम आ गया। जिला निर्वाचन अधिकारी अनिल कुमार दमेले ने बताया कि
मतगणना का कार्य शीघ्र समाप्त करने के लिए 534 टेबल लगाए गए थे। वर्ष 2010
की मतगणना में मात्र 278 टेबल ही लगाए गए थे। उसका परिणाम रहा कि मतगणना
समाप्त होने में 26 घंटे से अधिक का समय लग गया था।
प्रतिबंध के बावजूद जुलूस निकाले गए
राज्य
निर्वाचन आयोग की ओर से जीत के बाद जुलूस निकालने पर मनाही की गई थी। मगर
लोंगो ने आदेशों का खूब उल्लघंन किया। जीत के बाद प्रत्यशी औा उनके
समर्थकों की ओर से सड़कों पर निकल जीत के जुलूस निकाले गए, जिसके चलते
आवागमन आधिक रहा। बाइक जुलूस तक निकाले गए। जीत की खुशी का आलम यह था कि
लोग ढोलक की थाप पर जीत का जश्न मना रहे थे। ऐसे लोगों को पुलिस भी नहीं
रोक रही थी। हालांकि कई प्रत्याशियों ने नियमों का पालन भी किया।