संवाद न्यूज एजेंसी कप्तानगंज (बस्ती)। कक्षा छह में पढ़ने वाली 11 वर्षीय छात्रा की स्कूल के कमरे में मृत पाए जाने की सनसनीखेज घटना की परतें उघड़नी शुरू हो गई हैं।
अब तक खुदकुशी मानकर चल रही कयासबाजी बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद निर्मूल साबित हुई। जिस तरह की चोटें और शव की हालत पाई गई है, उससे मामला बेहद उलझ गया है। साथ ही, उसके परिवार और स्कूल के लोग भी संदेह के घेरे में आ गए हैं, जो पुलिस को कदम-कदम पर गुमराह कर रहे थे।
बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम हाउस पर चर्चा थी कि छात्रा के पिता ने पुलिस को गुमराह कर अपने सिर आफत मोल ले लिया। यदि उसने अपनी बेटी के चेहरे, सिर और अन्य चोटों को देखकर उसके बारे में पुलिस को बता दिया होता तो अब तक गुनहगार कानून के शिकंजे में होता।
लोगों को यहां तक कहते सुना गया कि पिता के ऊपर शक की सूई नहीं घूमती, यदि उसने घटना के बाद पुलिस को सूचना दे दी होती। शुरू से ही किस दबाव में उसने गलत बयानी कर सबको उलझाए रखा, यह तो स्पष्ट नहीं है, मगर, उसका कहना है कि गांव वालों ने उसे डरा दिया था कि पुलिस को खबर करोगे तो फंस जाओगे...।
पोस्टमार्टम हाउस पर पूछा गया कि आखिर उसने कई तरह की बातें कर सबको क्यों उलझाए रखा तो उसने कहा कि गांव के लोगों ने उसे काफी डरा दिया था। सिलसिले वार उसने घटनाक्रम के बारे में बताया। हालांकि, उसकी बातों पर बिना पुष्टि के यकीन करना जोखिम भरा है। उसने बताया कि सूचना मिलने के बाद शव लाने स्कूल गया तो गांव के काफी लोग मौजूद थे।
सब लोगों ने एक सुर में कहा कि जितनी जल्दी संभव हो लाश को कहीं ठिकाने लगा दो।
पुलिस पहुंच गई तो तुम जेल चले जाओगे। इसलिए वह आनन-फानन गांव के कुछ लोगों के साथ ले जाकर शव जमीन में गाड़कर घर चला आया।
वहां से लौटने के बाद जब अधिकारी पहुंचे तो उसने यह कहना शुरू कर दिया घाट पर ले जाकर उसने शव जला दिया।
फॉरेंसिक टीम के साथ सीओ स्वर्णिमा सिंह मंगलवार को उसे उस स्थान पर चलने के लिए कहा तो वह फिर गुमराह करते हुए पुलिस को दूसरे घाट पर लेकर चला गया था। इन सबके पीछे उसने गांव वालों का दबाव बताकर पल्ला झाड़ लिया।ि