बस्ती। शहरी से लेकर गांव तक के बाजार में रंगीन फास्टफूड व चटनी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की भरमार है। फास्टफूड मेंं धड़ल्ले से रंगों का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं मोमो चटनी को स्वादिष्ट बनाने के लिए धंधेबाज हानिकारक लिक्विड डाल रहे हैं। इनके सेवन से न सिर्फ संक्रमण का शिकार हो सकते हैं, बल्कि त्वचा के साथ अन्य बीमारी भी घेर लेंगी। ऐसे बाहरी खाद पदार्थों के सेवन के समय सावधानी बरतने की जरूरत है।
बता दें कि फुटपाथ और सड़क पटरियों पर सजी दुकानों पर युवाओं की भीड़ लगी रहती है। मोमोज, चाऊमीन, बर्गर के शौकीन बढ़े हैं। तो बच्चों को भी यह लत तेजी से लग रही है। बच्चे-बड़े ही चाव से ऐसे फूड्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। मगर वह मोमोज व चटनी में मिलाए जा रहे हानिकारक रसायन से अनभिज्ञ हैं, उसकी फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। बावजूद इसके खाद्य सुरक्षा विभाग अभी संजीदा नहीं हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में हर तीसरे बच्चे में फास्ट-फूड की वजह से पेट की बीमारी मिल रही है। आंतों में संक्रमण तक हो रहा है। वहीं, आवास विकास कॉलोनी के बाहर गेट पर पिछले पांच साल से एक दुकानदार मोमोज के साथ मिलावटी चटनी परोस रहा था। शक होने पर ग्राहक एकत्र हुए और प्रारंभिक जांच में एक वीडियो में दुकानदार चटनी में हानिकारक लिक्विड मिलाते दिख रहा है। इसपर लोगों ने उसकी पिटाई कर दी हालांकि मौका पाकर युवक भाग निकला, तभी से दुकान बंद है।
अब सोशल मीडिया पर लोग मोमोज न खाने की अपील कर रहे हैं। संवाद न्यूज एजेंसी इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करती। मगर, लोग विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल कर रहे हैं। सड़क पटरियों पर खुलेआम ठेले पर रंगीनयुक्त खाद्य पदार्थ बिक रहे, मगर जिम्मेदार आंख मूंद लिए हैं। अधिकांश ठेले बिना पंजीयन के भी हैं। गांधीनगर, कटरा, आवास विकास, तहसील गेट, कंपनीबाग, रोडवेज, दक्षिण दरवाजा, जिला अस्पताल व मंगल बाजार में यह खेल जारी है।
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फास्टफूड में मिलाते हैं सिंथेटिक कलर व चटनी
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएस पटेल ने बताया कि फास्टफूड में सिंथेटिक रंग, केमिकल और मैदा की अधिक मात्रा से पेट में विकार बढ़ रहे हैं। ओपीडी में औसतन 100 से 120 मरीज आते हैं। इनमें से 10 फीसदी में पेट में दर्द, सूजन, अपच, भूख कम लगना की शिकायत मिल रही है। इनमें पांच फीसदी बच्चे ऐसे हैं जो फास्ट फूड और बाजार का भोजन अधिक कर रहे हैं। जिसमें कई बच्चों की हालत ज्यादा खराब मिल रही है। पूछताछ में पता चला कि ये सप्ताह में तीन से चार दिन फास्ट फूड खाते हैं। इसमें पेट में अल्सर, आंत में संक्रमण, सूजन हो रही है। कुछ की सर्जरी भी करानी पड़ रही है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा के अनुसार, फास्टफूड में स्वाद के लिए केमिकल और रंग मिलाए जाते हैं। फाइबर युक्त भोजन की कमी हो रही है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घट रही है। बच्चे हरी सब्जी व अन्य पौष्टिक भोजन से बचते हैं, जिससे कुपोषित भी हो रहे हैं। साफ-सफाई में कमी से डायरिया भी होता है।
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सिंथेटिक रंग से लाल हो रही चटनी
एमडी डॉ. पीएल गुप्ता के अनुसार, फास्टफूड में स्वाद के लिए केमिकल और चटनी-सॉस में सिंथेटिक रंग मिलाए जा रहे हैं। लंबे समय तक इसके उपयोग से आंत में संक्रमण ओर पीलिया मिल रहा है। पेट में अल्सर, नसों में खिंचाव, पेट में दर्द, भूख कम लगना समेत अन्य परेशानी मिल रही है। दवाएं देने के साथ अभिभावकों को बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की सलाह भी देते हैं।
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इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चों को हरी सब्जी, फल, सलाद खाने पर जोर दें।
- हरी सब्जी से बच्चों के लिए घर पर पसंदीदा सामग्री बनाएं।
- स्कूलों में कैंटीन में फास्टफूड पर सख्ती से रोक लगाई जाए।
- खाद्य विभाग फास्टफूड की गुणवत्ता के लिए सैंपलिंग लें।
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ग्रोथ रोकने के साथ लीवर और किडनी को नुकसान
डॉ. अखिलेश मद्धेशिया ने बताया कि फास्टफूड के खाद्य सामग्री में लाल कलर और हरा केमिकल कलर मिलाते हैं, यह शरीर की ग्रोथ रोकने के साथ ही लीवर व किडनी को नुकसान पहुंचाता है। मेटानिल येलो कलर का इस्तेमाल लड्डू से लेकर जलेबी, बिरयानी, मोमोज व उसकी चटनी में किया जाता है। इसका पेट, किडनी और लीवर पर सबसे ज्यादा असर होता है। इससे पेट में इंफेक्शन के साथ ही शरीर में एलर्जी और यूरिन इंफेक्शन भी हो सकता है।
कोट
ठेले और खाद्य पदार्थ बिक्री और निर्माण इकाई पर जांच जारी है। संदिग्ध खाद्य सामग्री जैसे चटनी से लेकर रंगीन फास्टफूड की सैंपलिंग कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। आवास विकास कॉलोनी गेट के सामने स्थित मोमोज की दुकान संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच कराई जा रही है।
-चितरंजन कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य, ग्रेड-दो, बस्ती।